नयी दिल्ली, 22 अगस्त कर्नाटक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को निरस्त करने संबंधी राज्य के उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार के बयान की आलोचना करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि नयी शिक्षा नीति कोई राजनीतिक दस्तावेज नहीं बल्कि भविष्योन्मुखी दार्शनिक दस्तावेज है जिसे शिक्षाविदों ने 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया है।
प्रधान ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘ कल कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने एक बयान दिया कि वह अपने राज्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को निरस्त कर देंगे। मैं कहना चाहता हूं कि इस संबंध में आपके (शिवकुमार) तथ्य गलत है, आपका बयान नुकसानदायक और प्रतिगामी है।’’
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति वर्ष 2020 से लागू है और इसे शिक्षाविदों ने 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया है।
प्रधान ने कहा कि नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति कोई राजनीतिक दस्तावेज नहीं है बल्कि यह भविष्योन्मुखी दार्शनिक दस्तावेज है।
शिक्षा मंत्री ने सवाल किया कि आप कर्नाटक के युवाओं को क्या संदेश देना चाहते हैं, आप कर्नाटक में किस प्रकार की राजनीति कर रहे हैं ?
वहीं, खबरों के अनुसार, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने सोमवार को कहा था कि राज्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को स्कूली पाठ्यक्रम से निरस्त कर दिया जायेगा और एक वैकल्पिक शिक्षा प्रणाली जल्द लायी जायेगी।
धर्मेन्द्र प्रधान ने कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार से सवाल किया कि क्या वह और कांग्रेस पार्टी औपचारिक शिक्षा के भाग के रूप में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा का विरोध करती है ? उन्होंने पूछा कि क्या वह नहीं चाहते कि ‘‘हमारे बच्चे दूसरी कक्षा पूरी करते हुए बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान हासिल कर लें ? ’’
शिक्षा मंत्री ने यह भी पूछा कि क्या वह बच्चों के पठन पाठन में स्थानीय भारतीय खिलौने, खेल और खेल आधारित शिक्षा का विरोध करते हैं ?
उन्होंने कांग्रेस नेता से सवाल किया, ‘‘क्या वह कन्नड़ और अन्य भारतीय ओं में शिक्षा का विरोध करते हैं ? क्या वह नहीं चाहते कि नीट, सीयूईटी, जेईई जैसी परीक्षाएं कन्नड़ सहित भारतीय ओं में हो ?’’
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