नयी दिल्ली, पांच जून ‘पापुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया’ (पीएफआई) ने 16वीं जनगणना का बृहस्पतिवार को स्वागत किया और यह सुनिश्चित करने के लिए “मजबूत सुरक्षा उपायों” का आह्वान किया कि जनगणना “समावेशी, सटीक और समानता पर केंद्रित” हो।
देशभर में जाति गणना के साथ जनगणना 2027 में शुरू होगी।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को घोषणा की थी कि जनगणना दो चरणों में कराने का निर्णय लिया गया है।
गैर-सरकारी संगठन पीएफआई ने एक बयान में कहा, “पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया 2027 में भारत में जनगणना कराने की घोषणा का स्वागत करता है। यह सुनिश्चित करने के लिए मजबूत सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए कि गणना समावेशी, सटीक और समानता पर केंद्रित हो।”
पीएफआई ने जनगणना में "जातिगत आंकड़ों" को शामिल करने का भी "दृढ़तापूर्वक" समर्थन किया और कहा, “जाति स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार में अवसरों के लिहाज से महत्वपूर्ण होती है, लेकिन राष्ट्रीय डेटासेट में इसके आंकड़े होते। यदि जातिगत आंकड़े न हों तो हम समावेशी नीतियां नहीं बना सकते।”
संगठन की कार्यकारी निदेशक पूनम मुटरेजा ने कहा कि आगामी जनगणना का उद्देश्य केवल लोगों की गिनती करना नहीं है, बल्कि इसकी प्रक्रिया को सही करना भी है।
उन्होंने कहा, “विकास की योजना एक दशक से भी अधिक समय से पुराने आंकड़ों के कारण बाधित रही है। अब हमारे पास यह सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण अवसर है कि जनगणना सभी भारतीयों, विशेषकर वंचित समुदायों की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करे।”
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