विदेश की खबरें | पोप फ्रांसिस के रुढ़िवादी आलोचकों ने अनूठे तरीकों से किया था उनका विरोध
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

उसने पोप फ्रांसिस की निगरानी में हो रही ‘मूर्ति पूजा’ की निंदा करने के लिए एक वीडियो टेप बनाकर विरोध दर्ज कराया और मूर्तियों को तिबर नदी में फेंक दिया।

इस घटना ने रेखांकित किया कि पोप फ्रांसिस के परंपरावादी आलोचक इतिहास के पहले लैटिन अमेरिकी पोप के प्रति अपने विरोध को व्यक्त करने के लिए किस हद तक जाने को तैयार थे।

व्यक्तिगत विरोध से लेकर सोशल मीडिया अभियानों, सम्मेलनों और याचिकाओं तक, रुढ़िवादियों ने स्पष्ट किया कि वे खुद को पोप से अधिक कैथलिक मानते हैं।

कॉलेज ऑफ कार्डिनल्स में उनके प्रतीकात्मक नेता संभवत: यह सुनिश्चित करने के लिए मशक्कत कर रहे होंगे कि उनकी भावनाओं के प्रति अधिक सहानुभूति रखने वाले किसी व्यक्ति को फ्रांसिस की जगह चुना जाए। पोप फ्रांसिस का सोमवार को 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

हर पोप के आलोचक होते हैं। और फ्रांसिस को शायद उम्मीद थी कि दो पीढ़ियों से कैथलिकों को अधिक रुढ़िवादी पोप की आदत हो जाने के बाद उन्हें अपने कट्टरपंथी सुधार एजेंडे के लिए विरोध का सामना करना पड़ेगा।

उन्होंने एक बार कहा था, ‘‘कुछ लोग मुझे मरवाना चाहते थे।’’ यह बात उन्होंने तब कही थी जब उन्होंने सुना कि रोम में कुछ धर्मगुरुओं ने उनके अस्पताल में रहने के दौरान भविष्य के सम्मेलन की योजना बनाना शुरू कर दिया था।

फ्रांसिस ने कुछ समय के लिए दक्षिणपंथी विपक्ष को बर्दाश्त किया, अक्सर उनके हमलों का जवाब चुप्पी से दिया।

उन्होंने एक बार अमेरिका में विपक्षी गठजोड़ का जिक्र करते हुए कहा था, ‘‘अगर अमेरिकी मुझ पर हमला करते हैं तो यह सम्मान की बात है।’’

साल 2022 में पोप बेनेडिक्ट 16वें की मृत्यु के बाद, फ्रांसिस ने विपक्ष को कुंद करने और अपने प्रगतिशील सुधारों को मजबूत करने की कोशिश की।

बेनेडिक्ट के अंतिम संस्कार के कुछ ही दिन के भीतर, उनके लंबे समय तक सचिव रहे एक अधिकारी ने एक संस्मरण प्रकाशित कराया जिसमें फ्रांसिस की अत्यधिक आलोचना की गई थी।

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