नयी दिल्ली, 25 अक्टूबर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को ‘प्रगति’ के 43वें संस्करण की बैठक की अध्यक्षता करते हुए सात राज्यों की लगभग 31,000 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं की समीक्षा की।
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने एक बयान में यह जानकारी दी।
प्रगति 'प्रो-एक्टिव गवर्नेंस' और समय पर कार्यान्वयन के लिए प्रौद्योगिकी आधारित मंच है, जिसमें केन्द्र और राज्य सरकारें शामिल हैं।
पीएमओ ने कहा, "बैठक में कुल आठ परियोजनाओं की समीक्षा की गई। इनमें से चार परियोजनाएं जल आपूर्ति और सिंचाई से संबंधित थीं, दो परियोजनाएं राष्ट्रीय राजमार्गों और संपर्क के विस्तार के लिए और दो परियोजनाएं रेल और मेट्रो रेल कनेक्टिविटी के लिए थीं।"
पीएमओ के मुताबिक इन परियोजनाओं की संचयी लागत लगभग 31,000 करोड़ रुपये है और ये सात राज्यों अर्थात बिहार, झारखंड, हरियाणा, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, गुजरात और महाराष्ट्र से संबंधित हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी निर्देश दिया कि उच्च जनसंख्या घनत्व वाले शहरी क्षेत्रों में परियोजनाओं को निष्पादित करने वाले सभी हितधारक नोडल अधिकारी नियुक्त कर सकते हैं और बेहतर समन्वय के लिए टीमों का गठन कर सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने सिंचाई परियोजनाओं के लिए सलाह दी कि हितधारकों के दौरे आयोजित किए जाएं, जहां सफल पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्य किए गए हैं। ऐसी परियोजनाओं के परिवर्तनकारी प्रभाव को भी दिखाया जा सकता है।
प्रधानमंत्री ने कहा, "इससे हितधारकों को परियोजनाओं के शीघ्र निष्पादन के लिए प्रेरणा मिल सकती है।"
प्रधानमंत्री ने ‘‘यूएसओएफ परियोजनाओं के तहत मोबाइल टावरों और 4 जी कवरेज’’ की भी समीक्षा की।
सार्वभौमिक सेवा दायित्व निधि (यूएसओएफ) के तहत 24,149 मोबाइल टावरों वाले 33,573 गांवों को मोबाइल कनेक्टिविटी की संतृप्ति के लिए कवर किया जाना है।
प्रधानमंत्री ने इस वित्तीय वर्ष के भीतर कवर नहीं किए गए सभी गांवों में मोबाइल टावरों की स्थापना सुनिश्चित करने के लिए कहा।
पीएमओ ने कहा, "इससे दूर-दराज के क्षेत्रों में मोबाइल कवरेज की संतृप्ति सुनिश्चित होगी।"
प्रगति बैठकों के 43वें संस्करण तक 17.36 लाख करोड़ रुपये की कुल लागत वाली 348 परियोजनाओं की समीक्षा की गई है।
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