देश की खबरें | पीएम केयर्स सरकारी नहीं, आरटीआई के तहत तीसरे पक्ष को जानकारी नहीं दी जा सकती: अदालत से कहा गया

नयी दिल्ली, 23 सितंबर दिल्ली उच्च न्यायालय को सूचित किया गया है कि प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और आपात राहत कोष ‘पीएम केयर्स’ सरकार का कोष नहीं है और इसके द्वारा एकत्र किया गया धन भारत की संचित निधि में नहीं जाता। इसके अलावा यह भी बताया गया कि संविधान और सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत किसी भी तीसरे पक्ष को जानकारी नहीं दी जा सकती।

पीएम केयर्स न्यास में मानद आधार पर अपने कार्यों का निर्वहन कर रहे प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में एक अवर सचिव द्वारा दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि न्यास पारदर्शिता के साथ काम करता है और एक लेखा परीक्षक उसकी निधि की लेखा परीक्षा करता है। यह लेखा परीक्षक भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक द्वारा तैयार किए गए पैनल में शामिल चार्टर्ड एकाउंटेंट होता है।

इसमें दलील दी गयी है कि संविधान और आरटीआई कानून के तहत पीएम केयर्स फंड की स्थिति के बावजूद तीसरे पक्ष को जानकारी दिए जाने की अनुमति नहीं है।

यह हलफनामा उस याचिका के जवाब में दाखिल किया गया है जिसमें पीएम केयर्स कोष को संविधान के तहत ‘राज्य’ घोषित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है, ताकि इसकी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। उसी याचिकाकर्ता ने एक अन्य याचिका भी दायर की है और पीएम केयर्स फंड को आरटीआई कानून के तहत ‘लोक प्राधिकार’ घोषित किए जाने का आग्रह किया है। दोनों याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हो रही है।

मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति अमित बंसल की पीठ ने इस मामले में आगे की सुनवाई के लिए 27 सितंबर की तारीख तय की है।

प्रधानमंत्री कार्यालय में अवर सचिव प्रदीप कुमार श्रीवास्तव द्वारा दाखिल हलफनामे में कहा गया है, ‘‘पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए, न्यास द्वारा प्राप्त धन के उपयोग के विवरण के साथ लेखा परीक्षा रिपोर्ट उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर डाल दी जाती है।’’

अधिकारी ने कहा, ‘‘मैं कहता हूं कि जब याचिकाकर्ता लोक कल्याण के लिए काम करने वाला व्यक्ति होने का दावा कर रहा है और केवल पारदर्शिता के लिए विभिन्न राहतों के लिए अनुरोध करना चाहता है, तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि पीएम केयर्स भारत के संविधान के अनुच्छेद 12 की परि के दायरे में ‘राज्य’ है या नहीं।’’

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