देश की खबरें | दिल्ली के पते के बिना पंजीकरण नहीं करने के बार काउंसिल ऑफ दिल्ली के फैसले के खिलाफ अदालत में याचिका

नयी दिल्ली, 20 अप्रैल बिहार निवासी एक विधि स्नातक ने दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के पते के बिना दिल्ली बार काउंसिल में पंजीकरण नहीं करने के फैसले के खिलाफ बृहस्पतिवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने निर्देश दिया कि दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई करने वाली रजनी कुमार की याचिका पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया को पक्ष बनाया जाए। उन्होंने मामले के पक्षों से दूसरे राज्यों द्वारा लागू इसी तरह की निवास प्रमाण पत्र की शर्तों पर अगली तारीख को दलीलें रखने को कहा।

बार काउंसिल ऑफ दिल्ली ने 13 अप्रैल को एक अधिसूचना जारी कर कहा था कि यदि कोई आवेदक विधि स्नातक दिल्ली-एनसीआर के पते वाले आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र की प्रति नहीं देता तो उसका पंजीकरण नहीं किया जाएगा।

बार काउंसिल ऑफ दिल्ली के वकील ने कहा कि वह अपने सदस्यों को अनेक लाभ दे रही है और हर साल बड़ी संख्या में पंजीकरण होने से बहुत समस्याएं सामने आ रही हैं।

याचिकाकर्ता ने दलील दी कि बार काउंसिल ऑफ दिल्ली का फैसला एकपक्षीय, भेदभावपूर्ण है और अधिवक्ता अधिनियम के विरुद्ध है।

वकीलों ललित कुमार, शशांक उपाध्याय और मुकेश के माध्यम से दायर याचिका में याचिकाकर्ता ने कहा कि देश के सुदूर हिस्सों से विधि स्नातक बेहतर संभावनाओं और देश की सेवा करने की व्यापक सोच के साथ राष्ट्रीय राजधानी में आते हैं और बार काउंसिल ऑफ दिल्ली में पंजीकरण कराना चाहते हैं।

मामले में अगली सुनवाई दो मई को होगी।

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