पुणे, 20 अगस्त राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) प्रमुख शरद पवार ने रविवार को कहा कि विभाजन के दौरान की हिंसा संबंधी विचार युवा पीढ़ी तक पहुंचाना राष्ट्रीय और सामाजिक एकता के संबंध में गलत होगा।
पवार का यह बयान इस मुद्दे पर विद्यालयों को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के हालिया परिपत्र की पृष्ठभूमि में आया है।
पवार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार शिंदे और राज्य के मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता चंद्रकांत पाटिल की मौजूदगी में एक स्कूल के उद्घाटन के अवसर पर बोल रहे थे।
पवार ने कहा, ‘‘मैं हाल ही में सीबीएसई (केंद्र सरकार द्वारा नियंत्रित एवं प्रबंधित केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) द्वारा जारी एक परिपत्र से चिंतित हूं, जिसमें उसने अपने तहत आने वाले विद्यालयों से छात्रों को विभाजन के दौरान उत्पन्न स्थिति के बारे में सूचित करने के लिए कहा है।’’
राकांपा संस्थापक पवार ने कहा, ‘‘विभाजन का इतिहास रक्तपात के बीच देश के विभाजन का इतिहास है। हजारों लोग विस्थापित हुए। सिंधी समुदाय के कई लोगों को भारत में पलायन करना पड़ा। पंजाब में भी ऐसी ही स्थिति थी। कई मुस्लिम पाकिस्तान चले गए।’’
पवार ने कहा कि हालांकि परिपत्र में महाराष्ट्र सरकार की कोई भूमिका नहीं है, लेकिन उसे सीबीएसई के सामने अपने विचार अवश्य व्यक्त करने चाहिए।
पवार ने कहा, ‘‘राष्ट्रीय और सामाजिक एकता के संबंध में युवा पीढ़ी में ऐसे विचार (विभाजन संबंधी हिंसा) डालना गलत है। राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी विषय समाज में संघर्ष उत्पन्न न करे।’’
चौदह अगस्त को 2021 में केंद्र सरकार द्वारा विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस या घोषित किया गया, जिस दिन पाकिस्तान को आजादी मिली। यह उन लोगों को श्रद्धांजलि है जिन्होंने विभाजन के कारण अपनी जान गंवाई और अपनी जड़ों से विस्थापित हो गए।
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