(तस्वीर के साथ)
(ललित के. झा)
वाशिंगटन, 28 फरवरी लेखिका एवं राजनीतिज्ञ क्षमा सावंत ने गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों में जाति के आधार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए सोमवार को कहा कि सिएटल सिटी काउंसिल द्वारा जाति आधारित भेदभाव रोधी अध्यादेश पारित किया जाना उत्पीड़ित जाति के लोगों के लिए ‘‘ऐतिहासिक जीत’’ है।
भारतीय अमेरिकी राजनीतिज्ञ एवं अर्थशास्त्री क्षमा सावंत ने सिएटल सिटी काउंसिल में भेदभाव न करने की नीति में जाति को शामिल करने के लिए पिछले सप्ताह एक प्रस्ताव पेश किया था, जिसे पारित कर दिया गया। इसके साथ ही सिएटल जाति आधारित भेदभाव को प्रतिबंधित करने वाला अमेरिका का पहला शहर बन गया।
उच्च जाति से संबद्ध सावंत (49) ने कहा कि वह भारतीय-अमेरिकियों के एक समूह के कड़े विरोध, प्रौद्योगिकी कंपनियों के प्रतिरोध और डेमोक्रेट पार्टी के लगभग असहयोग के बावजूद यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने में कामयाब रहीं।
सावंत ने भारतीय-अमेरिकियों के उस समूह को ‘‘हिंदू दक्षिणपंथी’’ करार दिया जिसने प्रस्ताव का विरोध किया था।
सावंत ने ‘पीटीआई-’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘ पिछले मंगलवार को अध्यादेश पारित हुआ, वह न केवल सिएटल में बल्कि अमेरिका, भारत और बाकी दुनिया में भी उत्पीड़ित जाति के लोगों के लिए एक असाधारण ऐतिहासिक जीत है क्योंकि यह पहला ऐसा अध्यादेश है जो जाति आधारित भेदभाव को प्रतिबंधित करता है।’’
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