देश की खबरें | संसद सुरक्षा चूक: महिला आरोपी की जमानत याचिका पर अदालत 11 सितंबर को आदेश सुनाएगी

नयी दिल्ली, नौ सितंबर राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत 13 दिसंबर को संसद की सुरक्षा में चूक के मामले में गिरफ्तार एकमात्र महिला नीलम आजाद की जमानत याचिका पर 11 सितंबर को अपना आदेश सुना सकती है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरदीप कौर ने सोमवार को आरोपी के वकील और सरकारी अभियोजक की दलीलें सुनने के बाद आजाद की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया।

न्यायाधीश ने सभी आरोपियों - आजाद, मनोरंजन डी, सागर शर्मा, अमोल धनराज शिंदे, ललित झा और महेश कुमावत - की न्यायिक हिरासत भी 16 अक्टूबर तक बढ़ा दी।

बहस के दौरान आजाद की ओर से पेश वकील ने न्यायाधीश से कहा कि वह संसद की सुरक्षा में सेंध लगाने की घटना में शामिल नहीं थी और उसे इस मामले में फंसाया गया है।

वकील ने दावा किया कि पुलिस ने मामले में पहले ही एक आरोपपत्र और दो पूरक आरोपपत्र दाखिल कर दिए हैं और अदालत उन पर संज्ञान ले चुकी है।

वकील ने अदालत को बताया, “मनोरंजन डी और सागर शर्मा संसद में कूदे और धुंआ फैलाया।”

उन्होंने कहा कि आजाद संसद के बाहर थी, जहां उसने “बेरोजगार युवाओं की समस्या को उजागर करने के लिए” इसी तरह के धुंए के कनस्तर खोले और पर्चे फेंके तथा वह सोशल मीडिया के माध्यम से जनता का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास कर रही थी।

आजाद ने दावा किया कि धुंआ फैलाने वाले ये कनस्तर हानिकारक नहीं थे।

आज़ाद ने अपने आवेदन में कहा, “वह आपराधिक साजिश का हिस्सा नहीं थी। जांच पूरी हो चुकी है और अदालत को मामले का फैसला करने में काफी समय लगेगा।”

अभियोजन पक्ष ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए अपराध को “गंभीर” बताया। उसने आरोप लगाया कि आज़ाद भारत की संप्रभुता और अखंडता को नुकसान पहुंचाने में शामिल थी।

अभियोजक ने अदालत को बताया कि वर्तमान आरोपी के खिलाफ मजबूत, ठोस, पुख्ता और विश्वसनीय सामग्री, सबूत और अन्य दस्तावेज हैं, जो मामले में उसकी संलिप्तता को दर्शाते हैं और इसलिए उसे ज़मानत नहीं दी जानी चाहिए।

आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत मामला दर्ज है।

अभियोजन ने अदालत को बताया कि आजाद उस अपराध में शामिल थी जिसके लिए आजीवन कारावास या मौत तक की सजा हो सकती है।

न्यायाधीश ने तीन अगस्त को मामले के संबंध में कठोर यूएपीए के तहत पुलिस द्वारा दायर पूरक आरोपपत्र पर संज्ञान लिया था।

वर्ष 2001 में संसद पर हुए आतंकवादी हमले की वर्षगांठ पर सुरक्षा चूक की एक बड़ी घटना हुई थी और सागर शर्मा और मनोरंजन डी. शून्यकाल के दौरान दर्शक दीर्घा से लोकसभा कक्ष में कूद गए, कनस्तरों से पीली गैस फैलाई और नारे लगाए, जिसके बाद कुछ सांसदों ने उन्हें काबू में कर लिया।

लगभग उसी समय, दो अन्य आरोपियों - अमोल शिंदे और आज़ाद - ने संसद परिसर के बाहर “तानाशाही नहीं चलेगी” के नारे लगाते हुए कनस्तरों से रंगीन धुआं फैलाया।

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