इस्लामाबाद, सात फरवरी पाकिस्तान में बृहस्पतिवार को होने वाले आम चुनाव से पहले प्रमुख अधिकार समूहों ने प्रमुख पार्टियों द्वारा सामान्य श्रेणी की कम से कम पांच प्रतिशत सीट महिलाओं को नहीं दिए जाने पर निराशा व्यक्त की है।
चुनाव अधिनियम, 2017 की धारा 206 के तहत पार्टियों के लिए यह कानूनी बाध्यता है। पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक बयान में महिलाओं के प्रतिनिधित्व की न्यूनतम आवश्यकता की वकालत की। इसके साथ ही पार्टियों से यह सुनिश्चित करने के लिए सकारात्मक कार्रवाई करने का भी आग्रह किया कि सामान्य सीटों पर उनके कम से कम एक तिहाई उम्मीदवार महिलाएं हों।
स्वतंत्र मानवाधिकार संस्था एचआरसीपी ने कहा,‘‘सैद्धांतिक रूप में यह एक न्यूनतम आवश्यकता होनी चाहिए। पार्टियों को यह सुनिश्चित करने के लिए सकारात्मक कार्रवाई करनी चाहिए कि सामान्य सीटों पर उनके कम से कम एक तिहाई उम्मीदवार महिलाएं हों।’’
राजनीतिक दलों द्वारा आठ फरवरी को होने वाले आम चुनाव के मैदान में उतारी गई महिला उम्मीदवारों की कुल संख्या पर पाकिस्तान चुनाव आयोग(ईसीपी) की ओर से अब तक कोई समेकित आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
औरत फाउंडेशन ने एक बयान में ईसीपी से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि सभी राजनीतिक दल प्रत्येक प्रांतीय और राष्ट्रीय विधानसभाओं के चुनाव में सामान्य सीटों पर पांच प्रतिशत टिकट महिलाओं को दें।
संगठन ने राजनीतिक दलों द्वारा उम्मीदवारों की अंतिम सूची के प्रकाशन में देरी के बारे में गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि टिकट आवंटन के लिए उनकी पात्रता के लिए अनुच्छेद 206 का अनुपालन एक कानूनी दायित्व था।
इसने चुनावी और राजनीतिक प्रक्रियाओं में महिलाओं की भागीदारी की सुरक्षा के लिए इसे कानूनी और संवैधानिक आवश्यकता बताया है।
संगठन ने कहा, ‘‘इन्हें पूरा नहीं करने पर पार्टियां चुनाव नहीं लड़ सकतीं।’’
ईसीपी ने भी इससे पहले राजनीतिक दलों से आगामी आम चुनाव में सामान्य सीटों पर महिलाओं का पांच प्रतिशत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का आग्रह किया था।
चुनाव अधिनियम, 2017 सामान्य सीटों पर महिला उम्मीदवारों के पांच प्रतिशत प्रतिनिधित्व को अनिवार्य करता है।
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