इस्लामाबाद, 13 दिसंबर पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय ने सैन्य अदालतों में आम नागरिकों के खिलाफ मुकदमा चलाने की बुधवार को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही न्यायालय ने 23 अक्टूबर के सर्वसम्मति से लिए गए अपने उस फैसले पर सशर्त रोक लगा दी, जिसमें उसने अधिकारियों को नौ मई की हिंसा में कथित भूमिका के लिए गिरफ्तार किए गए पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के समर्थकों के मामलों की सुनवाई सामान्य अदालतों में करने का आदेश दिया था।
न्यायालय की छह सदस्यीय पीठ ने अपने पिछले आदेश को चुनौती देने वाली ‘इंट्रा-कोर्ट अपील’ (आईसीए) की याचिका पर 5-1 के बहुमत के साथ यह फैसला सुनाया। पीठ में शामिल एकमात्र महिला न्यायाधीश मुसर्रत हिलाली ने इससे असहमति जताई।
सुनवाई के दौरान, अटॉर्नी जनरल मंसूर अवान ने अदालत से आरोपियों के खिलाफ सैन्य अदालत में मुकदमे फिर से शुरू करने की सशर्त अनुमति मांगी।
शीर्ष अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए अनुमति प्रदान की। हालांकि, न्यायालय ने कहा कि सैन्य अदालतें संदिग्ध लोगों के खिलाफ अंतिम फैसला नहीं सुनाएंगी।
अदालत ने कहा कि अंतिम फैसला उच्चतम न्यायालय के आदेश पर आधारित होगा।
उल्लेखनीय है कि 23 अक्टूबर को उच्चतम न्यायालय की पांच सदस्यीय पीठ ने फैसला सुनाया था कि नौ मई को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमलों में कथित भूमिका के लिए आम नागरिकों पर सैन्य अदालतों में मुकदमा चलाना संविधान के दायरे में नहीं आता।
कार्यवाहक संघीय सरकार के साथ-साथ बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब प्रांत की सरकारों और रक्षा मंत्रालय ने इस फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय के समक्ष ‘इंट्रा-कोर्ट अपील’ (आईसीए) दायर की थी।
उच्चतम न्यायालय के ताजा फैसले के बाद सैन्य अधिकारियों को नौ मई को सैन्य प्रतिष्ठानों पर हुए हमलों में शामिल सौ से अधिक नागरिकों पर मुकदमा चलाने की अनुमति मिल गई है।
तत्कालीन प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली कैबिनेट ने फैसला किया था कि नौ मई को सैन्य प्रतिष्ठानों में तोड़फोड़ करने वाले प्रदर्शनकारियों पर सैन्य अधिनियम और सरकारी गोपनीयता अधिनियम के तहत मुकदमा चलाया जाएगा।
पाकिस्तानी सेना के मुताबिक, 102 आरोपियों को मुकदमे के लिए सैन्य अधिकारियों को सौंप दिया गया है।
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