जरुरी जानकारी | पीएसीएल मामला: लोढ़ा समिति ने निेवेशकों को निेवेश दस्तावेज साझा करने से आगाह किया

नयी दिल्ली, दो जुलाई पीएसीएल के निवेशकों को उनके रिफंड मामलों को देख रही एक उच्चस्तरीय समिति ने आगाह किया है कि वे कंपनी की योजनाओं में निवेश से संबंधित दस्तावेजों को साझा नहीं करें।

यूट्यूब पर एक मोबाइल ऐप डाला गया है जिसमें निवेशकों से अपने दावे से संबंधित आवेदनों को डालने के लिए कहा गया है। इसके बाद समिति ने यह चेतावनी जारी की है।

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पीएसीएल समूह ने आम जनता से कृषि और रीयल एस्टेट कारोबार के नाम पर धन जुटाया था। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने अपनी जांच में पाया कि समूह ने 18 साल में गैरकानूनी सामूहिक निवेश योजनाओं (सीआईएस) के जरिये निवेशकों से 60,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई है।

सेवानिवृत्त न्यायाधीश आर एम लोढ़ा की अगुवाई वाली समिति निवेशकों को उनका धन लौटाने की व्यवस्था को देख रही हैं।

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सेबी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि लोढ़ा समिति ने बताया है कि उसे सूचना मिली है कि यूट्यूब पर एनएमजी राजस्थान ने एक वीडियो डालकर एक पोर्टल या जनलोक प्रतिष्ठान की मोबाइल ऐप के बारे में बताया है। इसमें निवेशकों को अपने दावे के आवेदन इस ऐप के जरिये डालने को कहा गया है।

समिति ने कहा कि यह मोबाइल ऐप (जनलोक पीएसीएल डाटा) गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। इसे जनलोक प्रतिष्ठान संस्थान द्वारा विकसित करने का दावा किया गया है।

बयान में कहा गया है कि यह मोबाइल ऐप संभवत: 26 मई से सक्रिय है। इसका एकमात्र उद्देश्य पीएसीएल के निवेशकों को रिफंड पाने में मदद करना है।

समिति ने कहा है कि उच्चतम न्यायालय ने सिर्फ उसे ही पीएसीएल के निवेशकों को रिफंड का काम देखने की जिम्मेदारी दी है। किसी अन्य व्यक्ति या इकाई को रिफंड दावों के लिए आवेदन मांगने के लिए अधिकृत नहीं किया है।

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