भोपाल, 18 सितंबर मध्य प्रदेश सरकार ने कोविड-19 के मरीज़ों को ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये एक आदेश जारी कर इस जीवन रक्षक गैस के निर्माताओं को अपने उत्पादन का 90 प्रतिशत हिस्सा चिकित्सा उपयोग के लिये आरक्षित करने का निर्देश दिया है।
प्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को इस आशय का आदेश जारी किया।
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आदेश में कहा गया है, ‘‘मध्यप्रदेश में तरल ऑक्सीजन के सभी परिवहनकर्ता, ऑक्सीजन गैस के निर्माण संयंत्र एवं ऑक्सीजन के री-फिलर्स अपने उत्पादन का 90 प्रतिशत हिस्सा चिकित्सा उपयोग के लिये उपलब्ध करायेंगे ।’’
इसमें कहा गया है कि शेष दस प्रतिशत ऑक्सीजन ही औद्योगिक या अन्य उपयोग के लिये दी जा सकती है।
आईनॉक्स नामक एक कंपनी नागपुर महाराष्ट्र के संयंत्र से मध्यप्रदेश को ऑक्सीजन की आपूर्ति करती थी। महाराष्ट्र सरकार द्वारा गैस परिवहन पर रोक लगा दिये जाने के बाद प्रदेश में ऑक्सीजन की कमी होने लगी।
इसके बाद पिछले सप्ताह प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से बात की और कोविड-19 के गंभीर मरीज़ों के उपचार के लिये ऑक्सीजन की आपूर्ति पर रोक नहीं लगाने का आग्रह पर ठाकरे ने चौहान को मध्यप्रदेश आपूर्ति बनाये रखने का आश्वासन दिया।
प्रदेश के जनसंपर्क विभाग ने हाल ही में बताया था कि कोविड-19 के मामलों में वृद्धि के मद्देनज़र मध्यप्रदेश को प्रतिदिन 110 टन ऑक्सीजन की जरुरत होती है।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हमने वैकल्पिक व्यवस्था भी की है। प्रारंभ में मध्यप्रदेश में ऑक्सीजन की उपलब्धता केवल 50 टन थी जो अब बढ़ाकर हमने 120 टन कर दी है और 30 सितम्बर तक हम 150 टन ऑक्सीजन की व्यवस्था कर लेंगे।’
उन्होंने बताया कि प्रदेश में स्थापित छोटे छोटे संयंत्र अपनी क्षमता का 50-60 प्रतिशत ही ऑक्सीजन बना पा रहे हैं। हमने उन्हें पूरी क्षमता से संयंत्र चलाने का आग्रह किया है ताकि ऑक्सीजन की उपलब्धता में और वृद्धि हो सके।
चौहान ने कहा कि दीर्घकालिक योजना के तहत हमने आईनाक्स कंपनी को होशंगाबाद के बाबई के पास मुहासा में ऑक्सीजन संयंत्र स्थापित करने की मंजूरी दे दी है। अगले छह माह में 200 टन ऑक्सीजन बनाने की क्षमता वाला यह संयंत्र लगा दिया जायेगा।
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