गर्भावस्था के बारे में जानकारी देने के लिए किलकारी योजना के तहत 6.4 करोड़ से अधिक कॉल किए गए: सरकार
सरकार ने मंगलवार को राज्यसभा में बताया कि इस साल अप्रैल से नवंबर तक किलकारी योजना के तहत इंटरेक्टिव वॉयस रिस्पांस (आईवीआर) के माध्यम से गर्भावस्था, बच्चे के जन्म और बच्चे की देखभाल के बारे में जानकारी प्रदान करने के लिए 6.4 करोड़ से अधिक कॉल किए गए।
नयी दिल्ली, 19 दिसंबर: सरकार ने मंगलवार को राज्यसभा में बताया कि इस साल अप्रैल से नवंबर तक किलकारी योजना के तहत इंटरेक्टिव वॉयस रिस्पांस (आईवीआर) के माध्यम से गर्भावस्था, बच्चे के जन्म और बच्चे की देखभाल के बारे में जानकारी प्रदान करने के लिए 6.4 करोड़ से अधिक कॉल किए गए. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने मंगलवार को राज्यसभा में आंकड़े पेश करते हुए कहा कि 2022-23 में ऑडियो संदेश प्रदान करने के लिए 7.71 करोड़ कॉल किए गए थे, जबकि 2021-22 में 4.75 करोड़ कॉल किए गए थे.
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि किलकारी कार्यक्रम 15 जनवरी, 2016 को गर्भवती महिलाओं के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय की डिजिटल इंडिया पहल के तहत शुरू की गई मोबाइल-आधारित मुफ्त सेवा है। इसका उद्देश्य लाभार्थियों को गर्भावस्था, बच्चे के जन्म और बच्चे की देखभाल के बारे में जानकारी प्रदान करना और नवजात के देखभाल के लिए स्वस्थ विकल्पों के बारे में प्रोत्साहित करना है. मांडविया ने कहा कि यह एक ऑडियो-आधारित सेवा है, और इसलिए, ग्रामीण भारत की साक्षरता चुनौतियों को दूर करती है.
संदेश गर्भावस्था के दूसरे तिमाही में शुरू होता है और तब तक जारी रहता है जब तक कि बच्चा एक वर्ष का नहीं हो जाता। मांडविया ने कहा कि गर्भवती माताओं का डेटा आरसीएच पोर्टल से वेब सेवा के माध्यम से किलकारी तक लाया जाता है. कार्यक्रम माताओं और परिवारों को गर्भावस्था और शैशवावस्था के दौरान अपनाए जाने वाले व्यवहार और प्रथाओं के बारे में सूचित करता है. साप्ताहिक संदेश परिवारों को इस अवधि के दौरान प्रत्येक सप्ताह के लिए प्राथमिकता वाले कार्यों के बारे में शिक्षित करने, याद दिलाने और सुदृढ़ करने में मदद करते हैं.
मंत्री ने कहा कि यह कार्रवाई न केवल गर्भवती महिलाओं और बच्चों के जीवन को कई जोखिमों से बचाती है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करती है कि जन्म लेने वाला बच्चा स्वस्थ हो. किलकारी परियोजना 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों अर्थात असम, बिहार, छत्तीसगढ़, चंडीगढ़, दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, जम्मू और कश्मीर, त्रिपुरा, आंध्र प्रदेश और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की सेवा करती है.
केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘प्रकृति में अपनी विशिष्टता के कारण सभी राज्यों में माताओं और परिवारों के लिए कॉल मददगार रहे हैं. ऑडियो संदेशों के माध्यम से प्रदान की गई जानकारी प्रसव पूर्व और प्रसवोत्तर देखभाल के साथ-साथ पोषण के संदर्भ में सहायक है.’’संदेश लाभार्थियों को मांगी जाने वाली उचित स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं के बारे में समय पर जानकारी देने में सहायक थे.परिवारों को निरंतर किलकारी समर्थन से व्यवहार में बदलाव आया है और सेवा उपयोग में भी सुधार हुआ है. मांडविया ने कहा कि यह महामारी के दौरान भी उपयोगी साबित हुआ जब यात्रा करना और जागरूकता अभियान आयोजित करना मुश्किल था.
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(The above story first appeared on LatestLY on Dec 19, 2023 07:00 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

