नयी दिल्ली, 19 फरवरी राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने पश्चिम बंगाल के अधिकारियों को पर्यावरण नियमों का उल्लंघन कर सुंदरबन में बने होटल को ध्वस्त करने का आदेश दिया है.
एनजीटी ने रेखांकित किया कि पश्चिम बंगाल के सबसे बड़े आरक्षित क्षेत्र में हरित जंगल शामिल हैं, जो बाघों और कई प्रकार के पक्षियों, सरीसृप और बिना रीढ़ वाली प्रजातियों का आवास हैं और साथ ही यूनेस्को विश्व विरासत की सूची में शामिल हैं. यह भी पढ़ें: बंगाल सीमा पर पशु तस्करों के साथ हुई मुठभेड़ में बीएसएफ का जवान घायल
अधिकरण सुंदरबन में होटल निर्माण की मंजूरी संबंधी मामले की सुनवाई कर रहा था जिसमें पश्चिम बंगाल राज्य तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण (डब्ल्यूबीसीजेडएमए) ने आपत्ति जताई है.
एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए के गोयल नीत पीठ ने कहा कि सुंदरबन को तटीय नियमन क्षेत्र अधिसूचना के तहत अति असुरक्षित तटीय क्षेत्र (सीवीसीए) घोषित किया गया है और इसमें निर्माण की अनुमति नहीं है.
पीठ ने कहा, ‘‘हम डब्ल्यूबीसीजेडएमए के रुख को सही पाते हैं और परियोजना के तहत निर्माण को गैर कानूनी करार देते हैं। डब्ल्यूबीसीजेडएमए, जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की संयुक्त टीम तीन महीने में अवैध निर्माण के ध्वस्तीकरण और इलाके पुराने स्वरूप में बहाली सुनिश्चित करेगी।’’ इस पीठ में न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति बी अमित श्तेलकर के साथ विशेष सदस्य सेंथिल वेल भी शामिल थे.
गौरतलब है कि होटल सोनार बांगला का निर्माण सुंदरबन में परियोजना प्रस्तावक अभिषेक पॉल चौधरी, अनिंदा पॉल चौधरी, झुनु पॉल चौधरी और क्रिस्टिना पॉल चौधरी ने किया था.
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