नयी दिल्ली, 13 फरवरी राज्यसभा के नेता जेपी नड्डा ने बृहस्पतिवार को उच्च सदन से विपक्ष के बहिर्गमन को राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने का एक माध्यम करार दिया और आरोप लगाया कि कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दल उन लोगों के हाथ मजबूत कर रहे हैं जो देश को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने वक्फ संशोधन विधेयक, 2024 पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की रिपोर्ट पेश किए जाने के खिलाफ विपक्ष के विरोध के दौरान आसन के पास आने वाले सदस्यों को सदन से एक दिन के लिए निलंबित किए जाने की भी मांग की।
कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने जेपीसी की रिपोर्ट में विपक्षी सदस्यों की आपत्तियों को शामिल नहीं करने का आरोप लगाते हुए इसे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन करार दिया और भारी हंगामे के बाद उच्च सदन से बहिर्गमन किया।
नड्डा ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि आसन की ओर से अपना पक्ष और चिंताओं को रखने का हर मौका दिए जाने के बाद विपक्ष का व्यवहार दर्शाता है कि वे राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे थे।
उन्होंने कहा, ‘‘विपक्ष ने बहुत गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार किया है। इसकी निंदा होनी चाहिए। यह तुष्टीकरण की राजनीति है। ये देश को कमजोर करने के लिए... और सबसे बड़ा सवाल है कि कुछ लोग देश को तोड़ने की साजिश रच रहे हैं। कुछ लोग ‘इंडियन स्टेट’ के खिलाफ लड़ रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि विपक्ष का आज का बहिर्गमन कार्यवाही में दर्ज होना चाहिए कि ‘ये देशद्रोही गतिविधियों को प्रोत्साहित करने का एक माध्यम है, एक अभिव्यक्ति है’।
उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग देश को खंडित करना चाहते हैं, कांग्रेस और विपक्ष उनके हाथ मजबूत करने का काम कर रहे हैं।
नेता सदन ने सदन में हंगामे को बहुत धैर्य से संभालने और ‘दरियादिली’ दिखाने के लिए सभापति जगदीप धनखड़ की प्रशंसा की।
हालांकि, धनखड़ ने कहा कि उन्होंने दरियादिली नहीं दिखाई है बल्कि उन सदस्यों को गंभीरता से लिया जो आसन के करीब आ गए थे और हंगामा कर रहे थे।
उन्होंने कहा, ‘‘सदन को आज सत्र समाप्त होने से पहले फैसला लेना चाहिए ताकि ऐसे सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके अन्यथा इसके दूरगामी परिणाम होंगे।’’
इस पर नड्डा ने कहा, ‘‘उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए और उन्हें आज के लिए निलंबित कर दिया जाना चाहिए।’’
इस पर धनखड़ ने कहा कि इसके लिए कदम कानूनी मानदंडों के अनुसार उठाया जाना चाहिए।
इससे पहले, हंगामे के दौरान, धनखड़ ने तीन सदस्यों- समीरुल इस्लाम, नदीमुल हक और एम मोहम्मद अब्दुल्ला का नाम लिया था, जो सदन में हंगामे के दौरान आसन के निकट आ गए थे।
ब्रजेन्द्र
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