कोच्चि/तिरुवनंतपुरम, 26 मई केरल में विपक्षी कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने रविवार को केरल में शराब नीति को लेकर वाम सरकार की आलोचना की और आबकारी मंत्री एम बी राजेश तथा पर्यटन मंत्री पी ए मोहम्मद रियास पर जनता से यह "झूठ" बोलने का आरोप लगाया कि "शुष्क दिवस" नियम को रद्द करने के संबंध में कोई चर्चा नहीं हुई।
कांग्रेस ने इस मुद्दे पर पिनराई विजयन की चुप्पी पर सवाल उठाया और पूछा कि आरोपों को लेकर सतर्कता जांच का आदेश क्यों नहीं दिया गया। वहीं, भाजपा ने मुख्यमंत्री को याद दिलाया कि उनके मित्र एवं दिल्ली के उनके समकक्ष अरविंद केजरीवाल तथा उनके कैबिनेट सहयोगियों को सरकारी नीति को बदलने के लिए इसी तरह के मुद्दे पर जेल जाना पड़ा।
कांग्रेस ने सरकार से आरोपों की न्यायिक जांच की घोषणा करने और आबकारी मंत्री को बर्खास्त करने का आग्रह किया, जबकि भाजपा ने मुख्यमंत्री विजयन से जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपने की मांग की।
राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता वी डी सतीशन ने एर्णाकुलम में एक संवाददाता सम्मेलन में सवाल किया कि शिकायत मिलने के बावजूद आरोपों की सतर्कता जांच का आदेश क्यों नहीं दिया गया।
सतीशन ने राज्य के पर्यटन और आबकारी मंत्रियों के इन दावों को खारिज किया कि "शुष्क दिवस" मानदंड के संबंध में कोई चर्चा नहीं की गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों मंत्री ''सरासर झूठ'' बोल रहे हैं और कहा कि सरकारी स्तर पर बैठकें हुई थीं तथा उसके बाद बार मालिकों ने ''अनुकूल शराब नीति'' के लिए धन इकट्ठा करना शुरू कर दिया।
सतीशन ने "बार घोटाले" के खिलाफ आंदोलन की भी चेतावनी दी। कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि पर्यटन विभाग ने आबकारी विभाग को दरकिनार करते हुए शराब नीति में हस्तक्षेप क्यों किया और इस मामले में "अनावश्यक जल्दबाजी" क्यों दिखाई।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विवाद खड़ा होने के बाद आबकारी मंत्री ने जो शिकायत पुलिस महानिदेशक से की है, वह भ्रष्टाचार के मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए है।
सतीशन ने आरोप लगाया, ''पिछले दो महीनों से शराब नीति पर चर्चा हो रही है।''
उन्होंने दावा किया कि 21 मई को पर्यटन विभाग द्वारा बुलाई गई एक बैठक में बार मालिकों ने भी हिस्सा लिया था।
सतीशन ने कहा, "मेरे पास उस ज़ूम मीटिंग का लिंक है। उस बैठक के दौरान शुष्क दिवस और बार के खुलने का समय बढ़ाने पर चर्चा हुई थी।"
कांग्रेस नेता ने पर्यटन विभाग पर बेवजह दखल देने का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि उसने बार मालिकों की बैठक क्यों बुलाई।
विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया, "सरकार का आश्वासन है कि चुनाव आचार संहिता हटने के बाद शराब नीति बदल दी जाएगी। तब भी मंत्रियों ने झूठ बोला कि उन्होंने इस पर विचार नहीं किया।"
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता वी मुरलीधरन ने इस विवाद पर सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) पर निशाना साधते हुए कहा कि मार्क्सवादी पार्टी और राज्य सरकार दोनों बार मालिकों पर दोषारोपण करके इस मुद्दे से खुद को दूर करने का प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने यहां पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा राजनीतिक दलों द्वारा व्यवसायियों से चंदा लिए जाने के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा, "लेकिन, सरकार की नीति बनाने या बदलने के लिए चंदा के नाम पर रिश्वत लेना लोगों और देश के हित के खिलाफ है।"
मुरलीधरन ने कहा कि जब मामला सामने आया तो आबकारी मंत्री ने दावा किया कि नीति में बदलाव के संबंध में कोई विचार-विमर्श नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि हालांकि, बाद में दस्तावेज़ पाए गए जो साबित करते हैं कि आबकारी और पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने इस संबंध में चर्चा की थी। उन्होंने कहा कि मंत्रियों की जानकारी के बिना ऐसी कोई चर्चा नहीं हो सकती।
भाजपा नेता ने आबकारी मंत्री राजेश पर पांच देशों की उनकी जारी विदेश यात्रा के विवरण को छुपाने का भी आरोप लगाया।
विदेश मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी का हवाला देते हुए मुरलीधरन ने कहा कि आबकारी मंत्री ने 22 मई को ही यात्रा के लिए आवेदन किया था। उन्होंने परिवार के साथ 10 दिवसीय विदेश यात्रा के लिए आबकारी मंत्री की आय का स्रोत जानना चाहा।
यह आलोचना ऐसी खबरें सामने आने के बाद आई है कि राज्य सरकार शराब की बिक्री के संबंध में 'शुष्क दिवस' (प्रत्येक कैलेंडर माह के पहले दिन राज्य में शराब नहीं बेचना) के नियम को खत्म करने पर विचार कर रही है, जिससे राज्य में सियासी बवंडर खड़ा हो गया।
कांग्रेस नीत यूडीएफ ने एलडीएफ (वाम लोकतांत्रिक मोर्चा) सरकार पर बार मालिकों को 'फायदा' पहुंचाने के लिए रिश्वत लेने का आरोप लगाया है, वहीं वाम दल ने दावा किया है कि उसने अपनी शराब नीति पर अभी तक कोई विचार-विमर्श नहीं किया है।
'शुष्क दिवस' नीति को वापस लेने का मुद्दा उस समय विवादों में घिर गया, जब एक ऑडियो क्लिप में कथित तौर पर बार एसोसिएशन के एक सदस्य द्वारा अन्य सदस्यों से 'अनुकूल शराब नीति' के लिए पैसे की बात कहे जाने की बात सामने आई। उक्त ऑडियो क्लिप का प्रसारण टेलीविजन चैनलों पर हुआ था।
कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी मोर्चे यूडीएफ ने आरोप लगाया कि वाम सरकार ने बार मालिकों से उनके अनुकूल नीति बनाने के लिए 20 करोड़ रुपये मांगे। इसने मंत्री राजेश के इस्तीफे की मांग की।
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