जरुरी जानकारी | सिर्फ पुरानी अधूरी परियोजनाओं को ही दी जाए मोहलतः घर खरीदार संगठन

नयी दिल्ली, 30 अगस्त घर खरीदारों के संगठन एफपीसीई ने सुझाव दिया है कि समय पर आवासीय परियोजनाएं पूरा नहीं कर पाने वाले रियल एस्टेट डेवलपरों को तीन साल की मोहलत सिर्फ पुरानी लंबित परियोजनाओं के लिए ही दी जानी चाहिए।

फोरम फॉर पीपुल्स कलेक्टिव एफर्ट्स (एफपीसीई) के अध्यक्ष अभय उपाध्याय ने केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी को लिखे एक पत्र में कहा है कि डेवलपरों को परियोजना पूरी करने के लिए मोहलत देने के पहले हर मामले का अलग से आकलन किया जाना चाहिए।

उपाध्याय ने नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत की अगुवाई वाली एक समिति की तरफ से हाल ही में पेश रिपोर्ट को लेकर घर खरीदारों की आशंकाएं जताई हैं। इस 14 सदस्यीय समिति का गठन पुरानी लंबित परियोजनाओं से संबंधित मसलों पर सुझाव देने के लिए किया गया था।

विशेषज्ञ समिति ने देश भर में अधूरी पड़ी आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने के लिए दिवाला संहिता में बदलाव करने और सब्सिडी वाली ब्याज दर की पेशकश करने वाली एक योजना लाने का सुझाव दिया है।

एक अनुमान के मुताबिक, इन स्थगित परियोजनाओं में चार लाख से अधिक आवासीय इकाइयां प्रस्तावित हैं।

एफपीसीई ने अपने पत्र में कहा है कि मंत्रालय को यह रिपोर्ट राज्यों एवं अन्य सरकारी विभागों को भेजते समय एक परिशिष्ट भी जोड़कर यह साफ कर देना चाहिए कि रियायतों एवं छूट का लाभ सिर्फ पुरानी स्थगित परियोजनाओं को ही मिलेगा। इन परियोजनाओं को चिह्नित करने के साथ उनका वर्गीकरण भी करना होगा।

घर खरीदारों के संगठन का कहना है कि अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए तीन साल की मोहलत देने का सार्वभौम फैसला नहीं होना चाहिए। इसका निर्धारण हर मामले की समीक्षा के बाद निर्माण पूरा करने के लिए जरूरी समय को ध्यान में रखते हुए किया जाए।

इसके साथ ही एफपीसीई ने रियल एस्टेट विनियमन प्राधिकरण (रेरा) की एक निगरानी समिति बनाने का सुझाव भी दिया है। इस समिति में घर खरीदारों, सम्मानित लोगों और गैर-सरकारी संगठनों को जगह देने की सलाह दी गई है।

प्रेम

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