चेन्नई, दो मार्च तमिलनाडु के राज्यपाल आर एन रवि ने रविवार को कहा कि मछुआरों के मुद्दे का राजनीतिकरण करने और इसके लिए केंद्र को दोषी ठहराने के बजाय राज्य सरकार का रचनात्मक दृष्टिकोण मछुआरों के आंसू पोंछने में काफी मददगार साबित होगा।
श्रीलंका से गिरफ्तार मछुआरों और उनकी नौकाओं की शीघ्र रिहाई की मांग करने वाले प्रदर्शनकारी मछुआरों से रामेश्वरम में मुलाकात के बाद रवि ने कहा कि मछुआरा समुदाय 1974 में (भारत और श्रीलंका के बीच) एक ‘अन्यायपूर्ण समझौते’ का शिकार है, जो राज्य के गरीब मछुआरों की आजीविका संबंधी चिंताओं के प्रति बेहद असंवेदनशील था।
राज्यपाल ने कहा कि सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) 1974 की गलतियों के लिए समान रूप से जिम्मेदार हैं, क्योंकि वह उस समय सत्ता में थी।
कानून मंत्री एस रेगुपति ने रवि पर पलटवार करते हुए कहा कि वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष के. अन्नामलाई के साथ ‘प्रतिस्पर्धा’ न करें क्योंकि राजीति करने के लिये यहां प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मौजूद हैं।
रेगुपति ने रवि से कहा कि वह कच्चातीवु के बारे में अपनी ‘काल्पनिक कहानियां’ बंद करें। मंत्री ने राज्यपाल से श्रीलंका में तमिलनाडु के मछुआरों की रिहाई का मामला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समक्ष उठाने का आग्रह किया।
मंत्री ने कहा कि राज्यपाल का ‘1974 की गलती’ का आरोप एक जंग लगा हथियार है और रवि के आरोपों का खंडन करने के लिए उन्होंने कई बिंदुओं को रेखांकित किया।
इसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि द्वारा कच्चातीवु के भारत का हिस्सा होने का सबूत पेश करना, संसद में कच्चातीवु द्वीप को सौंपे जाने का विरोध करना और कच्चातीवु द्वीप पर भारत और श्रीलंका के बीच हुए समझौते को रद्द करने की मांग करना शामिल है।
रेगुपति ने कहा कि भाजपा नेतृत्व ने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले कच्चातीवु मुद्दे को बड़े पैमाने पर उठाया, लेकिन पार्टी को राज्य के सभी 39 निर्वाचन क्षेत्रों और पड़ोसी पुडुचेरी की एकमात्र सीट पर हार का सामना करना पड़ा।
‘एक्स’ पर एक पोस्ट में राज्यपाल रवि ने कहा, ‘‘आज रामेश्वरम की अपनी यात्रा के दौरान मैंने मछुआरा समुदाय के हमारे परेशान भाइयों और बहनों से मुलाकात की। मैं उनके साथ गहरी सहानुभूति रखता हूं। वे 1974 के एक अन्यायपूर्ण समझौते के शिकार हैं, जो हमारे गरीब मछुआरों की आजीविका संबंधी चिंताओं के प्रति बेहद असंवेदनशील था।’’
रेगुपति ने आरोप लगाया कि रवि ने डीएमके द्वारा उठाए गए परिसीमन मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए केवल ‘केंद्र सरकार के एजेंडे को पूरा करने’ के लिए कच्चातीवु द्वीप के मुद्दे को उठाया है, जो पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है।
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