नयी दिल्ली, चार जुलाई गुरु पूर्णिमा की पूर्व संख्या पर उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने अपने विचारों और जीवन को संवारने के लिए लालकृष्ण आडवाणी सहित अपने सभी गुरुओं के प्रति शनिवार को आभार प्रकट किया।
फेसबुक पर एक पोस्ट में उन्होंने अपने शुरुआती दिनों में स्वतंत्रता सेनानी और नेता तेन्नेती विश्वनंदम और बाद में आडवाणी से मिली शिक्षाओं को याद किया है।
महज सवा साल की उम्र में अपनी मां को खोने वाले नायडू ने अपने दादा-दादी को अपना पहला गुरु बताया है। उन्होंने 55 अन्य गुरुओं का भी नाम लिया है जिन्होंने स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय में उनकी जीवन संवारने में मदद की।
शिष्य के जीवन के सर्वांगीण विकास में गुरु के महत्व को रेखांकित करते हुए नायडू ने शिक्षकों से अनुरोध किया कि वे प्रौद्योगिकी के इस जमाने में शिक्षा में व्यक्तिगत पुट भी डालें।
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उन्होंने इसपर जोर दिया कि राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण है क्योंकि वे ही सही संस्कारों और विचारों एवं परिपूर्ण व्यक्तित्व का विकास करते हैं।
उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि इंटरनेट कभी भी एक गुरु का स्थान नहीं ले सकता है।
उन्होंने लिखा है, ‘‘इंटरनेट आपको जमाने भर की सूचनाएं उपलब्ध करा सकता है, लेकिन सिर्फ एक गुरु ही कौशल का विश्लेषण करने और उसका मूल्यांकन करना सिखा सकता है। इसी कौशल से आपको जीवन में मुश्किल समय से बाहर निकलने का तरीका मिलेगा।’
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