चेन्नई, 26 दिसंबर साल 2004 में आई विनाशकारी सुनामी की बरसी के मौके पर सोमवार को तमिलनाडु के विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में एकत्र हुए लोगों ने इस आपदा में मारे गये लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए मौन जुलूस निकाला तथा मोमबत्तियां जलाईं।
दिवंगत लोगों के सम्मान में मछुआरों ने इस दिन अवकाश रखा।
चेन्नई से कन्याकुमारी तक तटरेखा के किनारे रहने वाले लोगों ने समुद्र तट पर मौन जुलूस निकाला और समुद्र में दूध व फूल पत्तियां अर्पण कर अपने परिजन को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि दी।
साल 2004 में 26 दिसंबर को इंडोनेशिया में सुमात्रा द्वीप के पास हिंद महासागर में आये भूकंप के बाद सुनामी आई थी जिसमें हजारों लोग मारे गये थे। उस दिन क्रिसमस मनाने के लिए वेलंकन्नी गए कई मछुआरों और आम लोगों की सुनामी की जानलेवा लहरों में मौत हो गई थी।
नागपट्टिनम जिले में लगभग 6,065 लोग मारे गए थे। यहां सोमवार को बड़ी संख्या में मछुआरों, आम लोगों, व्यापारियों और राजनीतिक दलों के सदस्यों ने विशाल जुलूस निकाला और अक्कराईपेट्टाई में दिवंगत लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
सुनामी के दौरान कई बच्चे अनाथ हो गए थे और कुछ माता-पिता ने अपने बच्चों को खो दिया था।
सुनामी की 18वीं बरसी के मौके पर कुड्डलोर, थूथुकुडी और कन्याकुमारी के मछुआरों ने भी समुद्र में दूध और फूल पत्तियां अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
नगोरे में, दरगाह के स्वामित्व वाली भूमि पर सामूहिक कब्रों पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
दक्षिण भारतीय मछुआरा कल्याण संघ के अध्यक्ष के. भारती के अनुसार, कई स्थानों पर मोमबत्तियां जलाई गईं और पीड़ितों की तस्वीरों वाले बैनर और होर्डिंग्स लगाए गए।
उन्होंने कहा, ‘‘हम 18 साल पहले भयावह आपदा में सैकड़ों लोगों की मौत के मंजर को नहीं भूल सकते। आज हमारे लोगों ने मृतकों को श्रद्धांजलि देने के लिए समुद्र में नहीं उतरने का फैसला किया।’’
माइलापुर विधानसभा के द्रमुक विधायक धा वेलू और सहकारिता, खाद्य तथा उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रधान सचिव डॉ. जे राधाकृष्णन भी यहां नोचिकुप्पमम में आयोजित जुलूस में सैकड़ों लोगों के साथ शामिल हुए।
घटना के समय नागपट्टिनम के जिलाधिकारी रहे राधाकृष्णन ने उस समय अपने माता-पिता को खो देने वाली चार साल की बच्ची सौम्या को गोद लिया था। उन्होंने इतने साल तक बच्ची को पाला-पोसा और इस साल फरवरी में उसकी शादी कर दी।
वेलू ने कहा, ‘‘सुनामी की आशंका किसी को नहीं थी। लहरें इतनी रफ्तार से आईं कि तमिलनाडु के पूरे तटीय क्षेत्र में इसका असर महसूस किया जा सकता था।’’
नोचिकुप्पम पहुंचने से पहले राधाकृष्णन की कार एक दुर्घटना का शिकार हो गयी। हालांकि इसमें कोई घायल नहीं हुआ। अधिकारी की कार का अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया, लेकिन वह कार से उतरकर हादसे के कारण प्रभावित यातायात को संभालते दिखे।
कासिमेडू में अन्नाद्रमुक के पूर्व मंत्री डी जयकुमार ने अपनी पार्टी के सदस्यों के साथ समुद्र में दूध डालकर श्रद्धांजलि दी।
भारतीय जनता पार्टी की मछुआरा इकाई ने भी सुनामी पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी।
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