देश की खबरें | धारावी परियोजना अडाणी समूह को दिए जाने पर कांग्रेस ने कहा: ‘आधुनिक भारत में सबसे बड़ी लूट जारी’

नयी दिल्ली, 17 दिसंबर कांग्रेस ने धारावी पुनर्विकास परियोजना अडाणी समूह को दिये जाने को लेकर रविवार को सरकार की आलोचना की और कहा कि यह इस बात का उदाहरण है कि लोगों की कीमत पर समूह कैसे समृद्ध हो रहा है।

कांग्रेस का यह बयान धारावी पुनर्विकास परियोजना के खिलाफ मुंबई में विरोध प्रदर्शन के एक दिन बाद आया है।

बयान में कहा गया है कि सत्तारूढ़ दल के "पूर्ण समर्थन" के साथ पूरी जनता के सामने ‘‘आधुनिक भारत में सबसे बड़ी लूट जारी है"।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक बयान में आरोप लगाया कि "मोदानी महाघोटाले" की अनोखी विशेषता सिर्फ यह नहीं है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने "करीबी मित्रों" को लाखों करोड़ रुपये का लाभ पहुंचा रहे हैं और ‘मोदी-मेड मोनोपॉली’ (3एम) स्थापित कर रहे हैं बल्कि यह भी है कि ये पैसा सीधे आम भारतीयों की जेब से आ रहा है।

उन्होंने कहा, “हम पहले से ही जानते हैं कि लाखों बिजली उपभोक्ता अधिक बिल वाले कोयले के आयात की बढ़ी हुई लागत वहन कर रहे हैं और मध्यम वर्ग के यात्रियों को ‘मोदानी’ द्वारा बढ़ाये गये हवाई अड्डा शुल्क का भुगतान करना पड़ रहा है।”

कांग्रेस अडाणी समूह पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार से गलत तरीके से फायदा उठाने का आरोप लगाते हुए हमलावर रही है। हालांकि अडाणी समूह आरोपों को खारिज करता रहा है।

रमेश ने कहा कि अब यह और भी स्पष्ट हो गया है कि धारावी पुनर्विकास परियोजना के असली लाभार्थी मुंबई या धारावी के लोग नहीं हैं, बल्कि "प्रधानमंत्री के सबसे करीबी मित्र हैं, जिन्हें देवेंद्र फडणवीस (महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री) का सहयोग और समर्थन प्राप्त है।

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि आधिकारिक और अनौपचारिक दावों के बावजूद, वास्तविकता यह है कि धारावी परियोजना के परिणामस्वरूप अडाणी समूह को धारावी के क्षेत्रफल के 6-7 गुना के बराबर यानी 10.5 करोड़ वर्ग फुट अचल संपत्ति का हस्तांतरणीय विकास अधिकार (टीडीआर) दिया जायेगा।

उन्होंने कहा कि यह बात मुंबई क्षेत्रीय कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष और धारावी की विधायक वर्षा गायकवाड़ के एक विस्तृत अध्ययन में सामने आई है।

रमेश ने बताया कि टीडीआर एक हस्तांतरणीय ऋण होता है जिससे बिल्डरों को स्वीकृत स्लम विकास परियोजनाओं में भूमि का उपयोग करने की अनुमति मिलती है और उन्हें अन्य क्षेत्रों में अतिरिक्त निर्माण अधिकारों के साथ मुआवजा दिया जाता है।

उन्होंने कहा, “हमने पहले प्रधानमंत्री से यह स्पष्ट करने का आग्रह किया था कि अडाणी समूह ने धारावी परियोजना कैसे हासिल कर ली? क्योंकि इसकी पहली की निविदा एक अलग ‘डेवलपर’ ने जीती थी लेकिन इसे रद्द करके दोबारा बोली लगाई गई। पिछली निविदा में ‘डेवलपर’ को पांच करोड़ वर्ग फुट के बराबर टीडीआर की पेशकश की गई थी, लेकिन अब इसमें 110 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है जिससे अडाणी समूह को 434 प्रतिशत तक का लाभ मिल सकता है।”

रमेश ने बयान में कहा, ‘‘यह इस बात का एक और उदाहरण है कि कैसे ‘मोदानी’ भारत के लोगों की क़ीमत पर समृद्ध हो रहे हैं। और यह याद दिलाता है कि कैसे आधुनिक भारत में प्रधानमंत्री और सत्ताधारी दल के समर्थन से सार्वजनिक रूप से सबसे बड़ी लूट जारी है।’’

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