नयी दिल्ली, 19 जुलाई तेल खली निर्यात जून में 35 प्रतिशत घटकर 2,80,001 टन रह गया। इसका मुख्य कारण विदेशों से रेपसीड खली की मांग में कमी है। खाद्य तेल उद्योग संगठन एसईए (सॉलवेन्ट एक्सट्रैक्टर्स एसोसएिशन ऑफ इंडिया) ने बुधवार को यह कहा।
पिछले साल इसी महीने में तेल खली का निर्यात 4,29,616 टन का हुआ था।
हालांकि, अप्रैल-जून के दौरान तेल खली का कुल निर्यात 19 प्रतिशत बढ़कर 12,10,045 टन हो गया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में 10,16,031 टन था।
वित्त वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही में सोयाबीन खली का निर्यात एक साल पहले की अवधि के 75,454 टन की तुलना में बढ़कर 3,64,611 टन हो गया।
अप्रैल-जून में रेपसीड खली का निर्यात घटकर 6,20,738 टन रह गया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में 7,06,906 टन था।
चालू वित्तवर्ष की पहली तिमाही में चावल भूसी खली का निर्यात घटकर 1,25,582 टन रह गया, जो निर्यात एक साल पहले की समान अवधि में 1,49,008 टन था।
अप्रैल-जून के दौरान अरंडी खली का निर्यात बढ़कर 90,750 टन हो गया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में 83,281 टन था।
पहली तिमाही के दौरान, दक्षिण कोरिया ने 2,47,012 टन तेलखली का आयात किया, जबकि एक साल पहले की अवधि में यह 3,38,850 टन था।
वियतनाम ने अप्रैल-जून के दौरान 1,92,656 टन तेल खली का आयात किया, जो पिछले साल की समान अवधि में 1,84,424 टन था, जबकि थाईलैंड ने पहले के 1,34,802 टन की तुलना में इस बार 1,86,960 टन तेल खली का आयात किया।
एसईए के आंकड़ों से पता चलता है कि बांग्लादेश ने अप्रैल-जून में भारत से 2,57,880 टन तेल खली खरीदा, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में उसने 1,25,439 टन तेल खली खरीदा था।
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