नयी दिल्ली, 25 जून राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने असम में तेल के कुएं में लगी आग पर काबू पाने में असफल रहने पर सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनी ऑयल इंडिया पर 25 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। अधिकरण का कहना है कि कुएं में लगी आग से पर्यावरण को बहुत नुकसान हो रहा है।
असम के तिनसुकिया जिले के बागजान स्थित तेल के कुंओं में से कुंआ संख्या पांच से पिछले 27 दिन से लगातार गैस का रिसाव हो रहा है और नौ जून को उसमें आग लग गई। आग पर काबू पाने के प्रयास में ऑयल इंडिया के दो दमकल कर्मी मारे जा चुके हैं।
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न्यायमूर्ति एस.पी. वांगडी और विशेषज्ञ सदस्य सिद्धांत दास की पीठ ने उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश बी.पी. की अध्यक्षता में एक समिति गठित की जो इस मामले पर 30 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
पीठ ने बुधवार को अपने आदेश में कहा, ‘‘ऑयल इंडिया लिमिटेड के खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्यावरण, जैव विविधता, मनुष्य और वन्य जीवों को पहुंची हानि, सार्वजनिक स्वास्थ्य को पहुंची हानि के संबंध में जो मामला बनता है उसे और कंपनी की कीमत को ध्यान में रखते हुए हम ऑयल इंडिया को 25 करोड़ रुपये की अंतरिम राशि तिनसुकिया के जिला मजिस्ट्रेट के पास जमा कराने का आदेश देते हैं।’’
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अधिकरण ने इस मामले में जो समिति गठित की है उसमें केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद के एक विशेषज्ञ, गुवाहाटी विश्वविद्यालय के डॉक्टर सरबेस्वर कलिता, वन जैव विविधता बोर्ड के पूर्व सदस्य अभय कुमार जौहरी और ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) के पूर्व अध्यक्ष अजित हजारिका शामिल हैं।
केन्द्र, असम सरकार और ऑयल इंडिया लिमिटेड को नोटिस जारी करते हुए अधिकरण ने कहा कि उसका मानना है कि इस मामले पर आगे की कार्रवाई करने से पहले इस पर विशेषज्ञों की राय जान लेना उचित रहेगा।
अधिकरण ने कहा, ‘‘राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और तिनसुकिया के जिला मजिस्ट्रेट समिति के सदस्यों को सुरक्षा और कोविड-19 के मद्देनजर निजी सुरक्षा उपकरण (पीपीई) मुहैया कराएंगे।’’
पीठ ने कहा कि समिति मौके पर जाए और वहां जन तथा वन्य जीवों की हुई हानि के बारे में पता लगाएं।
अधिकरण ने मामले की सुनवाई के लिए 29 जुलाई की तारीख तय की है।
कार्यकर्ता बोनानी कक्कड़ और अन्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अधिकरण ने यह आदेश दिया।
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