देश की खबरें | ‘‘कोविड-19 मरीजों के घरों के बाहर पोस्टर नहीं लगने से बीमारी की बुरी छवि मिटाने में मिलेगी मदद’’
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, नौ अक्टूबर कोविड-19 से संक्रमित या पृथक-वास में रहने व्यक्तियों के घरों के बाहर अब सचेत करने वाले पोस्टर नहीं चिपकाने के दिल्ली सरकार द्वारा निर्णय किये जाने के बाद विशेषज्ञों ने कहा है कि इससे इस बीमारी को लेकर जो बुरी छवि बन गई है उसे मिटाने में मदद मिलेगी।

विशेषज्ञों ने हालांकि कहा कि इसके ‘‘कुछ नुकसान भी हैं।’’

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आधिकारिक सूत्रों ने बृहस्पतिवार को कहा था कि राष्ट्रीय राजधानी में अब कोविड-19 मरीजों या पृथक-वास रह रहे व्यक्तियों के घरों के बाहर अब पोस्टर नहीं चिपकाये जाएंगे।

अपोलो अस्पताल में सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन डा. सुरंजीत चटर्जी ने इसे एक बहुत ‘‘सकारात्मक कदम’’ करार दिया।

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उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि इससे इस बीमारी को लेकर जो बुरी छवि बन गई है उसे मिटाने में मदद मिलेगी। एक मरीज आज बिहार से जांच के लिए मेरे क्लीनिक आया और उसे भय था कि उसे संक्रमण हो गया है। हालांकि उसके परिवार ने उसकी कभी जांच नहीं करायी और उसने बिहार में स्वयं को अपने घर में पृथक कर लिया था।’’

चटर्जी ने हालांकि चेतावनी दी कि घर पर पृथकवास में रहे व्यक्तियों को दी गई इस सुविधा का ‘‘दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘संक्रमित व्यक्तियों को घर पर रहना चाहिए और समाज के प्रति अधिक जिम्मेदारी दिखाते हुए सभी नियमों का पालन करना चाहिए तथा घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए।’’

चटर्जी ने साथ ही कहा कि इस कदम से उन चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों को भी राहत मिलेगी जो कोविड-19 से संक्रमित हो गए थे।

सरकारी राजीव गांधी सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में कोविड-19 प्रबंधन के लिए नोडल अधिकारी अजित जैन ने कहा कि इस निर्णय के फायदे और नुकसान, दोनों हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘जब किसी के घर के बाहर पोस्टर चिपकाया जाता है तो पड़ोसी परिवार से बचने का प्रयास करने लगते हैं। मरीज के ठीक होने के बाद भी लोग उनसे दूरी बनाते हैं।’’

जैन ने कहा कि इसलिए लोग अपनी जांच कराने से बचते हैं।

उन्होंने कहा कि इसका फायदा यह होगा कि लोग जांच कराने के लिए बड़ी संख्या में आगे आएंगे क्योंकि उनके संक्रमित होने पर भी उनके घरों के बाहर पोस्टर नहीं लगेंगे।

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