नयी दिल्ली, 18 जनवरी दिल्ली की एक अदालत ने शहर के उत्तर-पूर्वी हिस्से में फरवरी 2020 में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान एक नर्सिंग होम में आग लगाने के आरोप से पांच आरोपियों को मुक्त कर दिया।
अदालत ने हालांकि कहा कि वे दंगा करने के आरोप पर मुकदमे का सामना करेंगे।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमाचल ने मंगलवार को पारित आदेश में कहा, “ मुझे लगता है कि आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 436 का कोई स्पष्ट अपराध नहीं बनता है। लिहाजा उन सभी को अपराध से मुक्त किया जाता है...।”
भारतीय दंड संहिता की धारा 436 घर आदि को अग्नि या विस्फोटक पदार्थ से नष्ट करने से संबंधित है।
न्यायाधीश ने कहा कि धारा 436 लागू नहीं होती है और मामले को वापस संबंधित मजिस्ट्रेट अदालत को स्थानांतरित कर दिया।
अदालत ने कहा कि दंगाइयों द्वारा नर्सिंग होम को जलाने की कोई तस्वीर पेश नहीं की गई और इसके बजाय रिकॉर्ड पर एक जली हुई एंबुलेंस की तस्वीर लाई गई थी।
इसने कहा कि शिकायतकर्ता और उसके दो कर्मचारियों ने "सामान्य " का इस्तेमाल यह स्थापित करने के लिए किया कि 24 फरवरी 2020 को दंगों के दौरान दंगाई भीड़ ने नर्सिंग होम को जला दिया था।
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