पेरिस, दो सितंबर देश की सेना और चैम्पियन क्रिकेटर विराट कोहली से प्रेरित कुमार नितेश ने अपने पदार्पण पैरालम्पिक में स्वर्ण पदक जीता और भारत ने पैरा बैडमिंटन खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन के दम पर रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन के लक्ष्य की दिशा में अगला कदम रखा ।
आईआईटी मंडी से इंजीनियरिंग में स्नातक हरियाणा के 29 साल के नितेश ने अपने मजबूत डिफेंस और सही शॉट चयन की मदद से तोक्यो पैरालंपिक के रजत पदक विजेता बेथेल को एक घंटे और 20 मिनट चले मुकाबले में 21-14 18-21 23-21 से हराया।
भारत के योगेश कथुनिया (एफ56 चक्काफेंक) और बैडमिंटन खिलाड़ी तुलसीमति मुरुगेसन (एसयू5) ने रजत तथा मनीषा रामदास ने महिला एकल एसयू5 स्पर्धा में ही कांस्य पदक जीते ।
भारत अब तक 11 पदकों के साथ शीर्ष 25 में है । तीन साल पहले तोक्यो पैरालम्पिक में भारत ने 19 पदक जीते थे ।
नितेश से पहले निशानेबाज अवनि लेखरा ने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल (एसएच1) में स्वर्ण पदक जीता था।
नितेश ने मैच के बाद कहा, ‘‘मुझे अब भी कुछ अहसास नहीं हो रहा। शायद जब मैं पोडियम पर जाऊंगा और राष्ट्रगान बजेगा तो इस भावना का सामना कर पाऊंगा।’’
एसएल3 वर्ग के खिलाड़ियों के शरीर के निचले हिस्से में अधिक गंभीर विकार होता है और वह आधी चौड़ाई वाले कोर्ट पर खेलते हैं।
जब नितेश 15 वर्ष के थे तब उन्होंने 2009 में विशाखापत्तनम में एक रेल दुर्घटना में अपना बायां पैर खो दिया था लेकिन वह इस सदमे से उबर गए और पैरा बैडमिंटन को अपनाया।नौसेना अधिकारी के बेटे नितेश ने कभी अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए रक्षा बलों में शामिल होने का सपना देखा था। हालांकि दुर्घटना ने उन सपनों को चकनाचूर कर दिया।
उन्होंने फाइनल से पहले कहा था, ‘‘मैं विराट कोहली को भी प्रशंसक हूं क्योंकि जिस तरह से उन्होंने खुद को एक फिट खिलाड़ी में बदल लिया है। वह 2013 से पहले कैसे हुआ करते थे और अब वह कितने फिट और अनुशासित हैं।’’
महिला वर्ग में बाइस साल की शीर्ष वरीय तुलसीमति को फाइनल में चीन की गत चैंपियन यैंग कियू शिया के खिलाफ 17-21 10-21 से हार का सामना करना पड़ा।
दूसरी वरीय मनीषा ने डेनमार्क की तीसरी वरीय कैथरीन रोसेनग्रेन को 21-12 21-8 से हराकर कांस्य पदक जीता।
एसयू5 वर्ग उन खिलाड़ियों के लिए है जिनके ऊपरी अंगों में विकार है। यह खेलने वाले या फिर दूसरे हाथ में हो सकता है।
भारत के योगेश कथुनिया ने पेरिस पैरालंपिक में पुरुषों की एफ56 चक्का फेंक स्पर्धा में 42.22 मीटर के सत्र के अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ सोमवार को यहां रजत पदक जीता।
कथुनिया ने इससे पहले तोक्यो पैरालंपिक में भी इस स्पर्धा का रजत पदक जीता था।
इस 27 साल के खिलाड़ी ने अपने पहले प्रयास में मौजूदा सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 42.22 मीटर की दूरी तय की।
ब्राजील के क्लॉडनी बतिस्ता डॉस सैंटोस ने अपने पांचवें प्रयास में 46.86 मीटर की दूरी के साथ इन खेलों का नया रिकॉर्ड कायम करते हुए पैरालंपिक में स्वर्ण पदक की हैट्रिक पूरी की।
एफ 56 वर्ग में भाग ले वाले वाले खिलाड़ी बैठ कर प्रतिस्पर्धा करते है। इस वर्ग में ऐसे खिलाड़ी होते है जिनके शरीर के निचले हिस्से में विकार होता है और मांसपेशियां कमजोर होती है।
कथुनिया नौ साल की उम्र में ‘गुइलेन-बैरी सिंड्रोम’ से ग्रसित हो गये थे। यह एक दुर्लभ बीमारी है जिसमें शरीर के अंगों में सुन्नता, झनझनाहट के साथ मांसपेशियों में कमजोरी आ जाती है और बाद में यह पक्षाघात (पैरालिसिस) का कारण बनता है।
वह बचपन में व्हीलचेयर की मदद से चलते थे लेकिन अपनी मां मीना देवी की मदद से वह बाधाओं पर काबू पाने में सफल रहे। उनकी मां ने फिजियोथेरेपी सीखी ताकि वह अपने बेटे को फिर से चलने में मदद कर सके।
कथुनिया के पिता भारतीय सेना में सेवा दे चुके हैं।
उधर शेटराउ में भारतीय निशानेबाज निहाल सिंह और आमिर अहमद भट मिश्रित 25 मीटर पिस्टल (एसएच1) स्पर्धा के क्वालीफिकेशन दौर में क्रमश: 10वें और 11वें स्थान पर रहते हुए फाइनल में जगह बनाने में नाकाम रहे।
दोनों भारतीयों के प्रदर्शन में क्वालीफिकेशन के पहले चरण में निरंतरता दिखी। प्रीसिजन चरण के बाद निहाल 287 अंक के साथ चौथे जबकि आमिर 286 अंक के साथ आठवें और अंतिम क्वालीफाइंग स्थान पर चल रहे थे।
रेपिड चरण में हालांकि निहाल और आमिर दोनों 282 अंक ही जुटा पाए और कुल क्रमश: 569 और 568 का स्कोर बनाया जो फाइनल में जगह बनाने के लिए पर्याप्त नहीं था।
क्वालीफिकेशन दौर में शीर्ष आठ में रहने वाले निशानेबाज फाइनल में प्रवेश करते हैं।
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