नयी दिल्ली, 14 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने विधि विरुद्ध क्रियाकलाप (रोकथाम) अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले के आरोपी को झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा दी गयी जमानत के खिलाफ राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की याचिका बृहस्पतिवार को खारिज कर दी।
शीर्ष अदालत ने जमानत निरस्त करने की दलील को स्वीकार नहीं करते हुए मौखिक रूप से कहा, ‘‘आप जिस तरह से काम कर रहे हैं, ऐसा लगता है कि आपको किसी व्यक्ति के अखबार पढ़ने से भी समस्या है।’’
प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि उसे आरोपी को जमानत देने के उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने की कोई वजह नजर नहीं आती।
पीठ में न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी और न्यायमूर्ति हिमा कोहली भी शामिल हैं। पीठ ने कहा, ‘‘केंद्र सरकार की ओर से पक्ष रख रहे अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल की दलीलें सुनने के बाद और उपलब्ध सामग्री का सावधानी से अध्ययन करने के बाद हमें इकलौते प्रतिवादी को जमानत देने के उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने की कोई वजह नजर नहीं आती। तदनुसार विशेष अनुमति याचिका खारिज की जाती है।’’
एनआईए की ओर से अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल एस वी राजू ने दलील दी थी कि आरोपी, जो एक कंपनी का महाप्रबंधक है, भाकपा (माओवादी) से अलग हुए समूह ‘तृतीय प्रस्तुति समिति’ (टीपीसी) के निर्देश पर धन वसूली करता था।
हालांकि पीठ ने अपील को खारिज कर दिया।
उच्च न्यायालय ने इस बात को संज्ञान में लेकर आरोपी को जमानत दी थी कि उसने अपने आवास पर तलाशी और जब्ती के दौरान जांच एजेंसी को सहयोग दिया और सभी जरूरी दस्तावेज मुहैया कराये।
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