नयी दिल्ली, तीन फरवरी राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने आतंकवाद के वित्तपोषण संबंधी एक मामले में जेल में बंद जम्मू कश्मीर के सांसद रशीद इंजीनियर की संसद की कार्यवाही में भाग लेने के वास्ते अंतरिम जमानत के लिए दायर याचिका का सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में विरोध किया।
न्यायमूर्ति विकास महाजन के समक्ष इंजीनियर की याचिका पर अपने जवाब में एनआईए ने कहा कि यह अंतरिम जमानत प्रावधान के दुरुपयोग का एक अनूठा मामला है, जिसका इस्तेमाल तब संयम से किया जाना चाहिए जब संबंधित आरोपी को असहनीय दुख और पीड़ा हो।
एनआईए ने कहा कि सांसद के रूप में उनके चुनाव को राहत पाने के साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
रशीद की अंतरिम जमानत याचिका पर 4 फरवरी को सुनवाई होनी है। उन्होंने संसद के बजट सत्र में भाग लेने के लिए अंतरिम जमानत का अनुरोध किया है। संसद का यह सत्र 31 जनवरी से शुरू हुआ था और 4 अप्रैल तक चलेगा।
रशीद 2024 के लोकसभा चुनाव में बारामूला निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए थे। वह 2017 के आतंकी-वित्तपोषण मामले में गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत एनआईए द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद 2019 से तिहाड़ जेल में बंद हैं।
एजेंसी ने कहा कि सांसद एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं और उसे आशंका है कि वह गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं, जिनमें से कई जम्मू कश्मीर के हैं।
एजेंसी ने कहा, ‘‘...इसलिए संसद सदस्य (लोकसभा) के रूप में उनके चुनाव से कोई फर्क नहीं पड़ता और इसे उनके द्वारा उनके निर्वाचन क्षेत्र में रहने वाले लोगों को सेवा प्रदान करने की आड़ में अंतरिम जमानत पाने के साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।’’
एनआईए ने दलील दी कि मामले में उनकी हिरासत वैध है और उन्हें संसद की कार्यवाही में भाग लेने की अनुमति न देना उनके अधिकारों का उल्लंघन नहीं माना जा सकता तथा यह अंतरिम जमानत का आधार नहीं बन सकता।
इसने कहा कि आरोपी ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह किस तरह से अपने निर्वाचन क्षेत्र की सेवा करेंगे और एक अस्पष्ट कथन दिया गया कि वह ‘‘निर्वाचन क्षेत्र की सेवा’’ करना चाहते हैं।
एनआईए ने कहा कि रशीद अपनी नियमित जमानत याचिका के मामले में असफल होने के बाद संसद की कार्यवाही में भाग लेने या अपने निर्वाचन क्षेत्र की सेवा करने के बहाने का इस्तेमाल कारावास से बचने के लिए कर रहे हैं।
एजेंसी ने कहा, ‘‘...याचिकाकर्ता बारामूला से संसद सदस्य हैं और एक अत्यधिक प्रभावशाली व्यक्ति हैं। जवाब देने वाले प्रतिवादी (एनआईए) को आशंका है कि चूंकि कई गवाह जम्मू कश्मीर से हैं, इसलिए याचिकाकर्ता गवाहों को प्रभावित कर सकता है।’’
इस दलील पर कि राष्ट्रपति ने उन्हें संसद सत्र में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है, एनआईए ने कहा कि यह एक नियमित मामला है क्योंकि इस तरह के निमंत्रण सभी सांसदों को भेजे गए हैं।
एजेंसी ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता के आचरण की जांच की जा रही है क्योंकि उन्हें प्रदान की गई टेलीफोन सुविधा का दुरुपयोग किया गया है और उत्तर देने वाले प्रतिवादी ने पहले विशेष अदालत (एनआईए) के समक्ष प्रासंगिक दस्तावेज पेश किए हैं।’’
एजेंसी ने अदालत द्वारा निर्देशित किए जाने पर इन दस्तावेजों को सीलबंद लिफाफे में दाखिल करने की इजाजत मांगी।
वैकल्पिक रूप से, राशिद की याचिका में बजट सत्र के दौरान हिरासत पैरोल का अनुरोध किया गया है। यह याचिका एनआईए के मामले में जमानत के अनुरोध वाली उनकी लंबित याचिका का हिस्सा है। उनकी मुख्य याचिका में उच्च न्यायालय से आग्रह किया गया है कि या तो निचली अदालत द्वारा उनकी लंबित जमानत याचिका का शीघ्र निपटान करने का निर्देश दिया जाए या उच्च न्यायालय मामले का स्वयं निर्णय करे।
एनआईए के वकील ने कहा कि जांच एजेंसी ने नवंबर में रजिस्ट्रार जनरल को मामले की सुनवाई के लिए निचली अदालत के निर्धारण के मुद्दे पर पत्र लिखा था, लेकिन उन्हें अनुरोध की स्थिति के बारे में जानकारी नहीं है।
ईडी ने एनआईए की प्राथमिकी के आधार पर आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ धनशोधन का मामला दर्ज किया था, जिसमें उन पर ‘‘सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश रचने’’ और कश्मीर घाटी में व्यवधान पैदा करने का आरोप लगाया गया था।
एनआईए और ईडी के मामलों में पाकिस्तान आधारित लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख और 26/11 मुंबई हमले के मुख्य षड्यंत्रकारी हाफिज सईद, हिजबुल मुजाहिदीन के सरगना सैयद सलाहुद्दीन और अन्य के नाम हैं।
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