देश की खबरें | एनएचआरसी ने पत्रकार की हत्या को लेकर उप्र सरकार, डीजीपी को नोटिस जारी किये
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने रेत माफिया पर कथित तौर पर खबर छापने वाले एक पत्रकार की उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में हुई हत्या के सिलसिले में राज्य सरकार और राज्य के पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी किये हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।
नयी दिल्ली, 26 जून राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने रेत माफिया पर कथित तौर पर खबर छापने वाले एक पत्रकार की उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में हुई हत्या के सिलसिले में राज्य सरकार और राज्य के पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी किये हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि खबरों के मुताबिक पत्रकार शुभम त्रिपाठी कानपुर से प्रकाशित होने वाले हिंदी दैनिक कंपू मेल के लिये काम करते थे।
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अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने पत्रकार की हत्या पर मीडिया में आई खबरों का संज्ञान लिया और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव तथा पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को नोटिस जारी किये हैं।
हत्या की यह घटना पिछले हफ्ते घटी थी।
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आयोग ने एक बयान जारी कर कहा, ‘‘सरकार की लोकतांत्रिक प्रणाली में, मीडिया को चौथा स्तंभ माना जाता है, जिसे इस तरह से निर्मम तरीके से असमाजिक तत्वों का शिकार नहीं बनने दिया जा सकता। ’’
आयोग के बयान में कहा गया है कि त्रिपाठी जिले में अवैध रेत खनन के बारे में रिपोर्टिंग कर रहे थे और उनकी जान को खतरा था। कथित तौर पर उनके विरोधियों ने भी जिलाधिकारी के समक्ष उनके खिलाफ एक शिकायत दर्ज कराई थी।
बयान में कहा गया है, ‘‘राज्य सरकार को इस विषय की एक स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराने को भी कहा गया है और इसमें राज्य सीबी सीआईडी को प्राथमिकता देने को कहा गया है। मृतक के परिवार की और मामले के गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को भी कहा गया है।’’
बयान में कहा गया है, ‘‘जांच के दौरान जुटाये गये कॉल रिकार्ड के ब्योरे और अन्य फोरेंसिक साक्ष्य को सुरक्षित रखा जाए क्योंकि आयोग मामले पर विचार के दौरान उन्हें मंगा सकता है। इस मामले में चार हफ्तों के अंदर जवाब की अपेक्षा की जाती है।’’
आयोग ने बयान में कहा कि खबरों में यह कहा गया है कि कई मामलों में मीडिया कर्मियों को असमाजिक तत्वों द्वारा निशाना बनाया गया है और ज्यादातर मामलों में पुलिस अधिकारियों द्वारा दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
बयान में कहा गया है , ‘‘यह राज्य सरकार का कर्तव्य है कि वह समाज में व्याप्त अवैध गतिविधियों को उजागर करने के लिये जनहित में खतरा मोल लेने वाले मीडिया कर्मियों को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराए। ’’
इससे पहले, भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) ने पत्रकार की हत्या पर राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है।
पुलिस अधीक्षक रोहन पी कनाय ने बताया कि पिछले शुक्रवार को त्रिपाठी को उन्नाव की दूध मंडी के पास उस समय गोली मार दी गयी थी जब वह मोटरसाइकिल पर अपने दोस्त के साथ घर लौट रहे थे। उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया जहां उनकी मौत हो गयी।
पीसीआई ने एक बयान में कहा कि भारतीय प्रेस परिषद, उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में युवा पत्रकार त्रिपाठी की हत्या की घटना की कड़ी निंदा करती है।
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