नयी दिल्ली, 11 अप्रैल ‘नेशनल हॉकर्स फेडरेशन’ (एनएचएफ) ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को गर्मी के बढ़ते खतरे से बचाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर दिशानिर्देश जारी करें।
फेडरेशन ने कहा कि बढ़ते तापमान के कारण दो करोड़ से अधिक विक्रेताओं का जीवन और आजीविका खतरे में पड़ रही है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को लिखे पत्र में फेडरेशन ने कहा कि उष्ण लहर की आवृत्ति और तीव्रता में चिंताजनक रूप से वृद्धि हुई है।
इसने उष्ण लहर को आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत अधिसूचित आपदाओं में शामिल किए जाने की मांग की है।
फेडरेशन ने कहा कि रेहड़ी-पटरी विक्रेता आय के लिए लंबे समय तक बाहर रहते हैं, ऐसे में उष्ण लहर की चपेट में आने से उन्हें स्वास्थ्य जोखिम के साथ-साथ ग्राहकों की कम संख्या के कारण आय का नुकसान होता है, जिससे उन्हें ‘दोहरा-प्रभाव’ झेलना पड़ता है।
इसने कहा, ‘‘विक्रेताओं ने गर्मी से थकावट, शरीर में पानी की कमी होने, चक्कर आने और यहां तक कि तापघात की भी शिकायत की है। उष्ण लहर का असर जल्दी खराब होने वाले सामानों पर भी पड़ता है, जिससे उनका वित्तीय नुकसान बढ़ता है। ताजा सामान बेचने वाले विक्रेता, डेयरी और गर्मी से बचाने वाली अन्य वस्तुओं को बेचने वाले विक्रेताओं को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।’’
फेडरेशन ने पत्र में कहा कि बढ़ते खतरों के बावजूद रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के पास अक्सर छाया, पेयजल और प्राथमिक चिकित्सा सहायता जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव रहता है।
एनएचएफ ने मांग की कि सरकार विक्रेता सुरक्षा उपायों को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के दिशा-निर्देशों में शामिल करे तथा यह सुनिश्चित करे कि राज्य और शहरी निकाय उनका क्रियान्वयन करें।
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