देश की खबरें | एनजीटी ने तरल अपशिष्ट का अपर्याप्त प्रबंधन पर उप्र सरकार को 100 करोड़ रुपये का भुगतान करने को कहा

नयी दिल्ली, 16 सितंबर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश सरकार को प्रतापगढ़, रायबरेली और जौनपुर जिलों में तरल कचरे के अपर्याप्त प्रबंधन के लिए 100 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है।

एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की रिपोर्ट के अनुसार जैव उपचार से प्रदूषण के स्तर में कमी नहीं आई है। पीठ में न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल भी शामिल थे।

पीठ ने कहा कि वित्तपोषण की व्यवस्था करने के लिए निर्धारित की गई समय-सीमा काफी पहले समाप्त हो गई थी और उपचारात्मक कार्रवाई नहीं की गई। पीठ ने कहा कि स्पष्ट है कि इस तरह की चूक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और जल प्रदूषण के कारण जल जनित बीमारियां होती हैं जो कई बार घातक भी होती हैं।

हरित निकाय ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि भविष्य के लिए धन आवंटित किया गया है और कहा गया है कि आने वाले समय में प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सकता है लेकिन सवाल पिछले उल्लंघनों के लिए जवाबदेही को लेकर है।

पीठ ने कहा कि 31 अक्टूबर 2022 तक मलजल शोधन संयंत्र (एसटीपी) स्थापित करने के बारे में संबंधित अधिकारियों की दलीलों को स्वीकार भी कर लिया जाए लेकिन सीवेज और नालियों को एसटीपी से नहीं जुड़ने के कारण यह स्वीकार करना मुश्किल है कि प्रदूषण को नियंत्रित कर लिया जाएगा।

पीठ ने छह महीने के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट अधिकरण के रजिस्ट्रार जनरल के पास दायर करने को कहा।

अधिकरण प्रतापगढ़, रायबरेली और जौनपुर जिलों में सई नदी में मलजल के प्रवाहित होने के संबंध में एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था।

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