जरुरी जानकारी | एनएफआरए ने आईएलएण्डएफएस मामले में आडिटर पर 25 लाख का जुर्माना, सात साल की रोक लगाई

नयी दिल्ली, 22 जुलाई ‘दि नेशनल फाइनेंसियल रिपोर्टिंग अथारिटी (एनएफआरए) ने बुधवार को आईएलएण्डएफएस फाइनेंसियल सविर्सिज लिमिटेड (आईएफआईएन) के आडिट में की गई कथित गड़बड़ियों के मामले में उदयन सेन पर सात साल के लिये आडिट की रोक और 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

हालांकि, यह निर्देश दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के चलते 31 जुलाई तक प्रभावी नहीं होगा।

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सेन को डेलायॅट हस्किंस एण्ड सेल्स एलएलपी (डीएचएस) ने एक भागीदार के तौर पर अपने साथ जोड़ा था। आईएफआईएन की 2017- 18 वित्त वर्ष की सांविधिक लेखा परीक्षा (आडिट) इसी आडिट सेवा कंपनी ने की थी।

आईएफआईएन विविध कारोबार करने वाले आईएलएण्डएफएस समूह का हिस्सा है जिसके अंदर 2018 के अंत में बड़े वित्तीय संकट/गड़बड़ियों का भेद सामने आया।

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न्यायालय के 26 जून के आदेश का हवाला देते हुये एनएफआरए ने सेन पर पाबंदी के आदेश में कहा कि उसका आदेश 31 जुलाई तक प्रभाव में नहीं आयेगा। न्यायालय द्वारा मामले की 31 जुलाई को सुनवाई करने की उम्मीद है।

सेन ने फरवरी में मामले में एनएफआरए के अधिकार क्षेत्र को चुनौती देते हुये अदालत का रुख किया था।

एनएफआरए ने सेन पर 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही सेन को कहीं आडिटर के तौर पर नियुक्त किए जाने पर सात साल के लिये रोक लगा दी है।

एनएफआरए ने 88 पन्ने के आदेश में इस बात को नोट किया है कि जब कोई चार्टर्ड एकाउंटेंट कंपनी के प्रबंधन के साथ मिलकर कंपनी लेखा जोखा की रिपोर्ट के साथ धोखाधड़ी या गलत बयानी का भागीदार बनता है तो उसका इस तरह का पेशेवराना दुर्व्यवहार काफी गंभीर हो जाता है।

डेलायट के प्रवक्ता ने कहा कि एक पेशेवर लेखा कंपनी के तौर पर ‘‘हम इस बात को लेकर आश्चर्यचकित और चिंतित हैं कि एनएफआरए ने कंपनी के एक पूर्व भागीदार के खिलाफ जारी आदेश को सार्वजनिक करने और जारी करने का फैसला किया।’’

प्रवक्ता ने कहा कि यह भी तब किया गया कि एनएफआरए के अधिकार क्षेत्र के सवाल को लेकर मामला आदलत में लंबित है और इस पर दिल्ली उच्च न्यायालय को निर्णय देना है।

डेलायट इंडिया के पूर्व सीईओ सेन इस साल के शुरू में डेलायट से सेवानिवृत हुये हैं।

एनएफआरए ने पिछले साल दिसंबर में कहा था कि डीएचएस, आईएफआईएन के सांविधिक लेखा परीक्षा के मामले में आडिटिंग मानकों को पूरा करने मं असफल रही है।

एनएफआरए की स्थापना 2018 में हुई थी और यह कार्पोरेट कार्य मंत्रालय के अधीन आता है।

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