नयी दिल्ली, सात फरवरी छह दशक पुराने आयकर अधिनियम 1961 की जगह लेने वाला नया आयकर विधेयक प्रत्यक्ष कर कानूनों को पढ़ने-समझने में आसान बनाएगा, अस्पष्टता दूर करेगा और मुकदमेबाजी को कम करेगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि विधेयक को बजट सत्र में संसद में पेश किया जाएगा और इसे आगे की समीक्षा के लिए वित्त संबंधी स्थायी समिति के पास भेजा जाएगा।
वित्त सचिव तुहिन कांत पांडेय पहले ही संकेत दे चुके हैं कि नये विधेयक में प्रावधान और स्पष्टीकरण या लंबे वाक्य नहीं होंगे। यह कर तटस्थ होगा।
इस विधेयक को लाने के पीछे सरकार का इरादा क्या है और करदाताओं के लिए नये कानून के मायने क्या हैं, इसका स्पष्टीकरण इस तरह है:
सवाल: आयकर कानून की समीक्षा क्यों जरूरी है?
जवाब: आयकर कानून लगभग 60 साल पहले 1961 में बनाया गया था और तब से समाज में, लोगों के पैसे कमाने के तरीके और कंपनियों के कारोबार करने के तरीके में बहुत सारे बदलाव हुए हैं। समय के साथ आयकर अधिनियम में संशोधन किए गए। देश के सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने में तकनीकी प्रगति और बदलावों को देखते हुए, पुराने आयकर अधिनियम को पूरी तरह से बदलने की सख्त जरूरत है।
सवाल: वित्त मंत्री ने क्या घोषणा की?
जवाब: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 23 जुलाई, 2024 को अपने बजट भाषण में छह महीने के भीतर आयकर अधिनियम, 1961 की व्यापक समीक्षा की घोषणा की थी। उन्होंने एक फरवरी, 2025 को अपने 2025-26 के बजट भाषण में कहा कि इस विधेयक को चालू बजट सत्र में संसद में पेश किया जाएगा।
सवाल: नये आयकर अधिनियम में क्या करने का प्रस्ताव है?
जवाब: नये कानून के अधिक संक्षिप्त और सरल होने की उम्मीद है, जिसे एक आम आदमी भी समझ सके। सरकार का इरादा इसके आकार को आधा करना और को सरल बनाना है। इससे मुकदमेबाजी कम करने में भी मदद मिलेगी और इस तरह विवादित कर मांगों में कमी आएगी।
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