देश की खबरें | नयी शिक्षा नीति ‘व्यावहारिक’ जबकि पूर्व की नीतियां थीं ‘प्रयोगात्मक’ : झारखंड के राज्यपाल

रांची, नौ जुलाई झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस ने नयी शिक्षी नीति की प्रशंसा करते हुए कहा कि ‘‘यह व्यावहारिक’’ है जबकि पिछली शिक्षा नीति ‘‘प्रयोगात्मक’’ थी।

राज्यपाल रमेश बैस ने जमशेदपुर में ‘‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से भारतीय शिक्षा प्रणाली में सुधार’’ विषय पर आयोजित एक संगोष्ठी को शुक्रवार को संबोधित करते हुए यह बात कही।

बैस ने कहा, ‘‘पहली बार ऐसी शिक्षा नीति लाई गई है जो ‘व्यावहारिक’ प्रतीत होती है जबकि हमारे देश में पूर्व की सभी शिक्षा नीति ‘प्रयोगात्मक’ थी और अब तक हमारी शिक्षा प्रणाली मैकाले की शिक्षा पद्धति पर आधारित थी। मैकाले ने ऐसी शिक्षा पद्धति दी जो राष्ट्र की स्वतंत्रता के बाद भी हमारे हित में नहीं थी।’’

राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 व्यवहारिकता पर बल देता है।

उन्होंने कहा कि भारतीय अंतरिक्ष वैज्ञानिक डॉ. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में गठित आयोग द्वारा तैयार इस शिक्षा नीति को सरकार ने थोपने का कार्य नहीं किया। सरकार कानून के माध्यम से इसे अनिवार्य भी कर सकती थी।

राज्यपाल ने कहा कि इस शिक्षा नीति को लाया गया, आप शिक्षाविद् इसकी विशेषताओं को देखें और समझ परख कर इसका क्रियान्वयन करें।

राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ समीक्षा बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने हेतु पहल करने के संदर्भ में चर्चा की है।

उन्होंने कहा कि इस शिक्षा नीति में हमारे बच्चे अपनी रुचि के अनुसार विषय का चयन कर सकते हैं। यदि किन्हीं कारणों से उनकी पढ़ाई बीच में छूट जाती है तो वे फ़िर वहीं से पढ़ाई शुरू कर सकते हैं। इसमें ‘एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट’ प्रणाली की व्यवस्था है।

उन्होंने कहा कि पढ़ाई का मकसद सिर्फ नौकरी अथवा डिग्री हासिल करना नहीं है। शिक्षा का उद्देश्य ज्ञानार्जन व चरित्र निर्माण है।

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