नयी दिल्ली, 24 मई उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश नवीन सिन्हा ने कहा है कि संसद द्वारा पारित नये आपराधिक कानून अपराध से प्रभावी तरीके से निपटेंगे।
न्यायमूर्ति सिन्हा ने नये आपराधिक कानूनों की सफलता के लिए न्यायाधीशों और पुलिस के लिए प्रभावी प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता पर बल दिया।
न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) सिन्हा उच्चतम न्यायालय के वकील अश्विनी कुमार दुबे की पुस्तक "एंड ऑफ कोलोनियल लॉज - फ्रॉम विजन टू एक्शन" के विमोचन के अवसर पर बोल रहे थे।
पूर्व न्यायाधीश ने कहा, ‘‘समाज ने महसूस किया है कि समय बदल रहा है और समय के अनुसार कानून में बदलाव की आवश्यकता है। कानून समाज द्वारा निर्धारित मानदंड हैं, ताकि समाज में कानून-व्यवस्था और अनुशासन बना रहे।’’
न्यायमूर्ति सिन्हा ने कहा, "विधि निर्माताओं ने महसूस किया है कि मौजूदा कानून उद्देश्यों की पूर्ति नहीं कर पा रहे हैं। नये कानून अपराध से प्रभावी तरीके से निपटेंगे। इन कानूनों के कार्यान्वयन के लिए प्रशिक्षण बहुत महत्वपूर्ण है और न्यायाधीशों एवं पुलिस दोनों को प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है।"
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि मोदी सरकार ने ब्रिटिश शासन के "काले कानूनों" को समाप्त कर दिया है और लोगों को त्वरित एवं आसान न्याय प्रदान करने के लिए तीन नये कानून लागू किए हैं।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के न्यायाधीश सुधीर अग्रवाल ने कहा कि नए कानून न्याय प्रदान करने की प्रक्रिया को गति देंगे। उन्होंने कहा, "देश की विभिन्न अदालतों में करोड़ों मामले लंबित हैं। नये कानून न्याय प्रदान करने की प्रक्रिया को गति देंगे।"
वरिष्ठ पत्रकार और एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष आलोक मेहता ने कहा कि पुस्तक देश की प्राचीन न्याय प्रणाली के बारे में प्रामाणिक जानकारी देती है।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष आदिश अग्रवाल, वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश खन्ना, बेनेट यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ लॉ के डीन प्रदीप कुलश्रेष्ठ और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव रोहित पांडे भी समारोह में मौजूद थे।
देश के आपराधिक न्याय कानून को पूरी तरह से बदलने के लिए लाये गये तीन कानून- भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम- एक जुलाई से लागू होंगे।
तीनों कानूनों को पिछले साल 21 दिसंबर को संसद द्वारा पारित किया गया था और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 25 दिसंबर को इन पर अपनी मुहर लगा दी थी।
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