काठमांडू, 31 मई मुख्य विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस मधेश की पार्टियों की कुछ मांगों के समर्थन में संसद में एक अलग संविधान संशोधन विधेयक पेश करेगी, साथ ही भारत के साथ जारी सीमा गतिरोध के बीच देश के मानचित्र में बदलाव के लिए सरकार की तरफ से पेश एक अन्य विधेयक का समर्थन भी करेगी।
‘काठमांडू पोस्ट’ ने खबर दी है कि नेपाली कांग्रेस (एनसी) ने तत्कालीन प्रधानमंत्री और पार्टी अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा के समय में जुलाई 2017 में सबसे पहले विधेयक पेश किया था।
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इसने बताया कि हालांकि के पी शर्मा ओली की अध्यक्षता वाली तत्कालीन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल- एकीकृत मार्क्सवादी लेनिनवादी के विरोध के चलते यह पारित नहीं हो सका। ओली अब देश के प्रधानमंत्री हैं।
एनसी के केंद्रीय कार्य समिति की शनिवार को हुई बैठक में मधेश की पार्टियों के कुछ मांगों का समाधान करने के लिए तीन वर्ष पुराने संविधान संशोधन प्रस्ताव को फिर से लाने का निर्णय किया गया। अखबार ने पार्टी के उपाध्यक्ष बिमलेन्द्र निधि के हवाले से यह बात कही।
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खबर में कहा गया है कि तीन बिंदुओं वाला संशोधन प्रस्ताव मधेश के राजनीतिक दलों की कुछ मांगों को पूरा करने और 2015 के संविधान की व्यापक स्वीकार्यता को बढ़ाने से जुड़ा हुआ है।
मधेश के दो दल समाजवादी पार्टी नेपाल और राष्ट्रीय जनता पार्टी नेपाल नागरिकता और सीमा निर्धारित करने सहित कई मुद्दों को लेकर लंबे समय से संविधान में संशोधन की मांग करते रहे हैं।
भारत के साथ सीमा विवाद के बीच कानून, न्याय और संसदीय मामलों के मंत्री शिवमाया तुम्बाहांगफे ने नेपाल सरकार की तरफ से देश के मानचित्र को बदलने के उद्देश्य से रविवार को संविधान संशोधन विधेयक पेश किया। मुख्य विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस द्वारा विधेयक का समर्थन किए जाने के एक दिन बाद यह कदम उठाया गया।
यह संविधान में दूसरा बदलाव होगा।
नेपाल ने हाल में देश का संशोधित राजनीतिक एवं प्रशासनिक मानचित्र जारी किया था जिसमें उसने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण इलाकों लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा पर दावा किया था।
भारत ने इस पहल पर नाराजगी जताते हुए कहा कि क्षेत्र पर ‘‘बढ़ा-चढ़ाकर किए गए कृत्रिम’’ दावे को स्वीकार नहीं करेगा और पड़ोसी देश से इस तरह के ‘‘अनुचित मानचित्र दावे’’ से अलग रहने को कहा।
लिपुलेख दर्रा कालापानी के पास दूरवर्ती पश्चिमी इलाका है जो नेपाल और भारत के बीच विवादित सीमा क्षेत्र है। भारत और नेपाल दोनों कालापानी को अपना अभिन्न क्षेत्र बताते हैं।
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