नयी दिल्ली, सात अगस्त विदेशमंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को कहा कि भारत और भूटान असम के कोकराझार और भूटान के शहर गेलेफू के बीच रेल सम्पर्क स्थापित करने के लिए बातचीत कर रहे हैं, जिससे व्यापार और पर्यटन, दोनों को बढ़ावा मिल सकता है।
जयशंकर ने मीडिया से बातचीत में यह भी कहा कि म्यांमा की आंतरिक स्थिति ने महत्वाकांक्षी त्रिपक्षीय राजमार्ग पहल सहित विभिन्न आधारभूत परियोजनाओं के लिए चुनौतियां पैदा कर दी हैं।
भारत-म्यांमा-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग परियोजना को क्षेत्रीय सम्पर्क को बढ़ावा देने के लिए एक प्रमुख पहल के रूप में देखा जा रहा है।
जयशंकर ने कहा, ‘‘म्यांमा में आंतरिक स्थिति ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए चुनौतियां उत्पन्न कर दी हैं। इसमें त्रिपक्षीय राजमार्ग का वह खंड भी शामिल है, जो अभी भी निर्माणाधीन है, साथ ही 69 पुल भी शामिल हैं।’’
विदेश मंत्री 2014 के बाद से सीमा पर बुनियादी ढांचे और सम्पर्क में प्रगति पर मीडिया से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘‘वर्ष 2014 से मोदी सरकार ने सीमा पर बुनियादी ढांचे के निर्माण और सम्पर्क बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया है।''
भूटान के साथ सम्पर्क पर जयशंकर ने कहा कि भारत अधिक व्यापार और पर्यटन अवसर पैदा करना चाहता है। उन्होंने कहा, ‘‘गेलेफू से कोकराझार तक एक रेल सम्पर्क की असम सीमा पर संभावना तलाशी जा रही है, जो व्यापार एवं पर्यटन, दोनों को बढ़ावा दे सकता है।’’
बांग्लादेश के साथ सम्पर्क पहल पर, जयशंकर ने कहा कि बांग्लादेश में चट्टगांव और मोंगला बंदरगाहों के संचालन से पूर्वोत्तर राज्यों और पश्चिम बंगाल को आर्थिक रूप से काफी मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि पांच परिचालित बस सेवाएं, तीन सीमापार यात्री ट्रेन सेवाएं और दो अंतर्देशीय जलमार्ग, दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क की सुविधा प्रदान कर रहे हैं।
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत से बिजली की आपूर्ति, नेपाल से बिजली की पारगमन सुविधा और भारत निर्मित मैत्री संयंत्र में बिजली उत्पादन ऊर्जा परिदृश्य को बदल रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘नेपाल की तरह, हमारी पड़ोस प्रथम नीति आज बांग्लादेश के साथ रेल, सड़क, सीमा सुविधा, बिजली पारेषण और ईंधन आपूर्ति पर ध्यान केंद्रित कर रही है।’’
नेपाल पर जयशंकर ने कहा कि मोदी सरकार ने उस देश के साथ सम्पर्क के सभी पहलुओं पर कदम उठाये हैं जिससे सीमावर्ती राज्यों उत्तर प्रदेश और बिहार को फायदा हो रहा है।
जयशंकर ने जिन उल्लेखनीय घटनाक्रमों का हवाला दिया उनमें बीरगंज-रक्सौल (2018), बिराटनगर-जोगबनी (2020) और नेपालगंज-रुपईडीहा (2023) में एकीकृत जांच चौकी (आईसीपी) की स्थापना शामिल है।
उन्होंने कहा कि भैरहवा-सुनौली आईसीपी पर काम शुरू हो रहा है और आईसीपी दोधारा-चांदनी के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के बीच रेल सम्पर्क काफी बढ़ा है।
उन्होंने कहा, "कुर्था-बिजलपुरा खंड चालू हो गया है और बिजलपुरा-बरदीबास खंड का सर्वेक्षण किया जा रहा है। जोगबनी-बिराटनगर लिंक 2023 में कार्गो यातायात के लिए खोला गया था।"
विदेश मंत्री ने कहा कि रक्सौल-काठमांडू बड़ी लाइन के लिए अंतिम स्थल सर्वेक्षण किया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘मोतिहारी-अमलेखगंज (2019 में पूरी हुई) से पेट्रोलियम उत्पाद पाइपलाइन को चितवन तक बढ़ाया जा रहा है। सिलीगुड़ी-झापा से दूसरी पाइपलाइन की योजना बनाई जा रही है।"
श्रीलंका के संबंध में जयशंकर ने कहा कि नागपट्टिनम-कांकेसंथुरई और रामेश्वरम-तलाईमन्नार के बीच नौका सेवाएं शुरू करने पर सहमति बनी है। उन्होंने कहा कि चेन्नई और जाफना के बीच पहली बार उड़ान सेवाएं शुरू हुईं। उन्होंने कहा कि हाल ही में दोनों देश ग्रिड सम्पर्क, पेट्रोलियम पाइपलाइन और भूमि पुल की व्यवहार्यता का पता लगाने पर सहमत हुए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘जैसा कि देखा जा सकता है, हमारी सभी सीमाओं पर सीमा बुनियादी ढांचे और सम्पर्क में सुधार हुआ है। इससे हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा बढ़ी है और नये आर्थिक अवसर पैदा हुए हैं, साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है।’’
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