जरुरी जानकारी | स्वास्थ्य पर सार्वजनिक खर्च की प्राथमिकताएं नये सिरे से तय करने की जरूरत: देबरॉय

नयी दिल्ली, 29 जून प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष बिबेक देबरॉय ने सोमवार को कहा कि कोविड-19 महामारी ने स्वास्थ्य पर देश के सार्वजनिक खर्च की दिक्कतों को उजागर कर दिया है। उन्होंने कहा कि संसाधनों की कमी को देखते हुए स्वास्थ्य पर सार्वजनिक व्यय की प्राथमिकताएं पुन: तय करने की जरूरत है।

देबरॉय ने यह भी कहा कि मौजूदा संकट से एक सबक यह मिला है कि बहुत कुछ प्रशासन के विकेंद्रीकरण पर निर्भर करता है, क्योंकि भारत में प्रशासन की विषमता है।

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सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आभासी 'सांख्यिकी दिवस' समारोह में उन्होंने कहा, "कोविड-19 ने जो किया है, वह स्वास्थ्य पर खर्च तथा इसके प्रभाव की खामियों को चिह्नित किया है। संसाधनों की कमी को देखते हुए, न केवल स्वास्थ्य पर सार्वजनिक व्यय की प्राथमिकताएं नये सिरे से तय करने की जरूरत है बल्कि विकेंद्रीकरण की भी जरूरत है।’’

देबरॉय ने कहा कि डेटा को जितना हो सके विकेंद्रीकृत करना भी महत्वपूर्ण है।

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सरकार प्रोफेसर पी सी महालनोबि के जन्मदिन के अवसर पर हर साल 29 जून को सांख्यिकी दिवस मनाती है। इसका उद्देश्य रोजमर्रा के जीवन में आंकड़ों के इस्तेमाल को लोकप्रिय बनाना और जनता को इस बारे में जागरूक करना है कि आंकड़ों से नीतियां तैयार करने में कैसे मदद मिलती है।

इस आयोजन की अध्यक्षता केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने की।

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