गुवाहाटी, चार अगस्त असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा है कि भाजपा के ‘वैचारिक परिवार के संगठनों से जुड़ने के लिए कठिन परिश्रम और समर्पण की जरूरत होती है।’
एक ट्वीट में भाजपा नेता ने यह भी कहा कि उनके बेटे को भी आसानी से प्रवेश नहीं मिलना चाहिए।
वह अकादमिक विद्वान अशोक स्वैन के ट्वीट पर प्रतिक्रिया दे रहे थे जिन्होंने शर्मा, उनकी पत्नी एवं उनके दो बच्चों का फोटो साझा किया था।
स्वीडन के एक विश्वविद्यालय में ‘पीस एंड कंफ्लिक्ट रिसर्च’ के प्रोफेसर स्वैन ने ट्वीट किया, ‘‘हिंदू श्रेष्ठतावादी नेता अपने बच्चों को पढ़ने के लिए विदेश भेजते हैं, वे पश्चिमी परिधान पहनते हैं, शानो-शौकत की जिंदगी जीते हैं। लेकिन वे ‘हिंदू खतरे में हैं’ के नाम पर कभी उन्हें बजरंग दल या दुर्गावाहिनी या भाजपा के आईटी सेल से नहीं जुड़ने देते हैं।’’
दरअसल यह फोटो शर्मा ने स्वयं ही ट्विटर पर साझा किया था और लिखा था कि यह फोटो 31 जुलाई को उनकी पत्नी के जन्मदिन पर बेंगलुरू में परिवार के एकसाथ मिलकर भोजन करने के अवसर पर लिया गया।
स्वैन की टिप्पणी असम के दर्रांग जिले में बजरंग दल के प्रशिक्षण शिविर पर उठे विवाद के बीच आयी है। इस शिविर में बिना अनुमति के हथियार का प्रशिक्षण दिया जा रहा था।
स्वैन के पोस्ट को फिर साझा करते हुए शर्मा ने आश्चर्य प्रकट किया कि अकादमिक विद्वान एवं लेखक ‘‘बस एक पारिवारिक फोटो से ऐसे बड़े निष्कर्ष पर पहुंच गये।’’
मुख्यमंत्री ने लिखा, ‘‘भाजपा के आईटी सेल या हमारे वैचारिक परिवार के किसी अन्य संगठन से जुड़ने के लिए कठिन परिश्रम एवं समर्पण की जरूरत होती है। यह बस किसी नेता के बेटा/बेटी होने पर आधारित नहीं होना चाहिए। हमारे बच्चों को सहज प्रवेश का आपका सुझाव यह धारणा देता है कि आप वंशवादी उत्तराधिकार में यकीन करते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मेरे बेटे को आसानी से प्रवेश मत दीजिए। उन्हें प्रवेश हासिल करने दीजिए।’’
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