देश की खबरें | एनडीएमसी को निठारी में शनिवार तक अंतिम संस्कार के लिए दो चबूतरे तैयार करने का निर्देश
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नयी दिल्ली, 12 जून दिल्ली उच्च न्यायालय ने उत्तरी दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी) को यहां निठारी गांव में अंतिम संस्कार के लिए कम से कम दो चबूतरे तैयार करने के लिए शनिवार तक का समय दिया है। अदालत ने साथ ही कहा कि ऐसे और ढांचों की ‘‘तत्काल जरूरत’’ है।

न्यायमूर्ति नजमी वजीरी ने कहा कि 26 मई को एनडीएमसी को अंतिम संस्कार से जुड़ी सुविधाएं तैयार के लिए एक सप्ताह से अधिक का समय दिया गया था क्योंकि उसने पूर्व में मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए 12 नये शेड के निर्माण के लिए पूर्व में मौजूद ढांचे को गिरा दिया था।

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अदालत ने 10 जून के अपने आदेश में कहा, ‘‘अनुरोध पर उसे (एनडीएमसी) अंतिम संस्कार के लिए कम से कम दो चबूतरे शुरू करने के लिए शनिवार, 13 जून तक का समय दिया जाता है।’’

अदालत ने कहा, ‘‘दाह संस्कार के लिए अपेक्षित अन्य सभी सामग्री और सुविधाएं जैसे कि लकड़ी, पानी, अतिरिक्त शेड, शौचालय आदि का प्रावधान, उत्तर डीएमसी द्वारा सुनिश्चित किया जाए ताकि रविवार, 14 मई से दाह संस्कार किये जा सकें।’’

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अदालत गांव के निवासियों की ओर से दायर एक अर्जी पर सुनवायी कर रही थी जिसमें निगम द्वारा पहले से मौजूद अंतिम संस्कार चबूतरों को ध्वस्त करने और उसके लिए 12 नये शेड निर्माण के कदम को चुनौती दी गई थी।

ग्रामीणों की दलील थी कि निगम को ग्रामसभा की जमीन में दखल देने और ऐसी गतिविधि संचालित करने का कोई अधिकार नहीं है।

10 जून का आदेश अदालत ने मामले में उत्तर डीएमसी के हलफनामे पर गौर करने के बाद दिया जिसमें उसने गांव में अंतिम संस्कार के लिए निर्मित अस्थायी सुविधाओं की तस्वीरें लगायी थीं।

अदालत ने कहा कि निगम द्वारा निर्मित चबूतरे ‘‘स्पष्ट रूप से अपूर्ण और अल्पविकसित हैं।’’

अदालत ने कहा कि निगम द्वारा स्थापित दो शेड काफी बड़े होने चाहिए और कहा कि एनडीएमसी ने 26 मई के उसके पिछले आदेश का अक्षरश: पालन नहीं किया।

अदालत ने कहा, "इसके अलावा, शेड ऊंचा होना चाहिए ताकि दाह संस्कार से निकलने वाला धुआं स्वाभाविक रूप से निकल सके और वहां मौजूद लोगों को कोई दिक्कत नहीं हो।’’

उसने एनडीएमसी को उपयुक्त एक्जास्ट पंखे लगाने पर विचार करने के लिए कहा।

अदालत ने निगम को 16 जून को सुनवाई की अगली तारीख से पहले आदेशों के अनुपालन को दिखाने वाली तस्वीरों के साथ एक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया।

अदालत ने अपने आदेश में दिल्ली सरकार के अतिरिक्त स्थायी वकील नौशाद अहमद खान की दलील का भी उल्लेख किया कि विशेषकर कोविड-19 महामारी के कारण मृत्यु दर में वृद्धि होने के मद्देनजर श्मशान स्थल की काफी कमी है।

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