देश की खबरें | एनसीआरटीसी ने सौर ऊर्जा का बुनियादी ढ़ांचा स्थापित कर कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन घटाया: अधिकारी

नयी दिल्ली, 21 जून राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्रीय परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर पर सौर ऊर्जा के लिए बुनियादी ढांचा स्थापित करके प्राकृतिक संसाधनों से प्राप्त होने वाली ऊर्जा का उपयोग करने की दिशा में प्रगति कर रहा है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि एनसीआरटीसी तीन मेगावाट पीक (एमडब्ल्यूपी) आंतरिक सौर ऊर्जा उत्पन्न करता है, जिससे कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) के उत्सर्जन में हर साल 3,100 टन की कमी आती है।

एनसीआरटीसी के एक अधिकारी ने कहा, "इस पहल ने स्टेशनों, डिपो और रिसीविंग सबस्टेशनों को स्वच्छ और वहनीय ऊर्जा के केंद्रों में बदल दिया है। वर्तमान में, एनसीआरटीसी तीन मेगावाट पीक (एमडब्ल्यूपी) इन-हाउस सौर ऊर्जा उत्पन्न करता है, जिससे कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) उत्सर्जन में 3,100 टन वार्षिक कमी आती है।"

अधिकारी ने कहा कि 11 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य के साथ, एनसीआरटीसी का लक्ष्य सालाना लगभग 11,500 टन कार्बन डाई ऑक्साइड के उत्सर्जन को रोकना है। यह जलवायु परिवर्तन से निपटने में एक महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने बताया कि साहिबाबाद और गुलधर आरआरटीएस स्टेशनों पर सौर ऊर्जा संयंत्र चालू हैं। प्रत्येक की अधिकतम विद्युत क्षमता 729 किलोवाट (केडब्ल्यूपी) है। दुहाई आरआरटीएस स्टेशन की क्षमता 736 किलोवाट तथा दुहाई डिपो और दुहाई डिपो स्टेशन की क्षमता क्रमशः 585 किलोवाट और 108 किलोवाट है।

अधिकारियों ने बताया कि इसके अलावा 43 किलोवाट क्षमता वाला मुराद नगर रिसीविंग सब स्टेशन (आरएसएस) और 20 किलोवाट क्षमता वाला गाजियाबाद आरएसएस भी सौर ऊर्जा उत्पन्न करते हैं।

अन्य स्टेशनों पर सौर ऊर्जा स्थापना का काम अभी चल रहा है। अधिकारियों ने बताया कि प्लांट में सौर ऊर्जा उत्पादन की निगरानी 'क्लाउड-आधारित एप्लीकेशन' के माध्यम से की जाती है।

अधिकारी ने बताया कि साहिबाबाद, गुलधर और दुहाई सौर ऊर्जा संयंत्रों की छतों पर 1,600 से अधिक उच्च दक्षता वाले सौर पैनल लगाए गए हैं। इनसे प्रति स्टेशन सालाना 10 लाख यूनिट से अधिक बिजली पैदा होने की उम्मीद है, जिससे बिजली के खर्चे में कमी आएगी।

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