नागपुर, 22 दिसंबर महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल को बृहस्पतिवार को शीतकालीन सत्र की शेष अवधि के लिए सदन से निलंबित कर दिया गया।
पाटिल ने नार्वेकर के खिलाफ टिप्पणी की, जिसे लेकर सदन में हंगामा हुआ।
संसदीय कार्य मंत्री एवं भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) नेता चंद्रकांत पाटिल ने राकांपा की प्रदेश इकाई के प्रमुख जयंत पाटिल के खिलाफ निलंबन प्रस्ताव पेश किया, जो ध्वनि मत से पारित हो गया। जयंत पाटिल पिछले तीन दशक से सदन के सदस्य हैं।
सोमवार को शुरू हुआ राज्य विधानसभा का सत्र 30 दिसंबर तक जारी रहेगा।
इस मामले पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजित पवार ने कहा, ‘‘आज जो हुआ वह होना नहीं चाहिए था। कभी-कभी ऐसे शब्द बोले जाते हैं।’’
सदन से बहिर्गमन से पहले राकांपा के वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘मैं अनुरोध करता हूं कि विपक्ष को भी सत्ता पक्ष की तरह बोलने का अवसर मिलना चाहिए... हमने भी बिना हंगामे के सदन चलाने में मेहनत की है। मैं (जयंत पाटिल द्वारा) जो भी कहा गया, उस पर खेद व्यक्त करता हूं। मैं अनुरोध करता हूं कि जो कहा गया उसे अन्यथा ना लें।’’
पाटिल के निलंबन के बाद विपक्ष (राकांपा, कांग्रेस, उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना) ने सदन परिसर में सरकार और विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ प्रदर्शन किया।
नाराज विधायकों ने एकनाथ शिंदे नीत सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और सरकार को ‘‘भ्रष्ट तथा पक्षपातपूर्ण’’ बताया।
पत्रकारों से बातचीत में जयंत पाटिल ने कहा कि सत्तारूढ़ दल (भाजपा/शिंदे नीत शिवसेना) जानबूझ कर इस ‘बेमतलब के मुद्दे’ को उठा रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘विपक्ष के सदस्यों को सदन में बोलने का मौका नहीं मिल रहा है। मेरा माइक काम नहीं कर रहा था और मैं बोल भी नहीं रहा था, लेकिन सत्तापक्ष के विधायक आसन के पास आ गए और नारेबाजी करने करे। मैंने उनसे यह बेशर्मी बंद करने को कहा, लेकिन वे नाराज हो गए।’’
सांगली जिले के इस्लामपुर विधानसभा सीट से विधायक पाटिल ने कहा, ‘‘मैंने जो कहा, वह उनके गुस्से की वजह नहीं है, लेकिन स्थिति ऐसी हो गई है कि वो मुश्किल में फंस गए हैं।’’
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