नयी दिल्ली, 18 जनवरी राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में रेलवे भूमि के कथित अतिक्रमण मामले का संज्ञान लिया है।
आयोग के अध्यक्ष इकबाल सिंह लालपुरा ने बुधवार को कहा कि जल्द ही एक सदस्य को यह सुनिश्चित करने के लिए वहां भेजा जाएगा कि क्षेत्र में रहने वालों के साथ कोई अन्याय न हो।
उच्चतम न्यायालय ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में रेलवे के दावे वाली 29 एकड़ जमीन से अतिक्रमण हटाने के उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेश पर हाल में रोक लगा दी थी। न्यायालय ने इसे ‘‘मानवीय मुद्दा’’ बताते हुए कहा था कि 50,000 लोगों को रातोंरात नहीं हटाया जा सकता।
हल्द्वानी में रेलवे की भूमि से अल्पसंख्यकों को हटाने के अनुरोध को लेकर एनसीएम ने मामले का संज्ञान लिया है और जल्द ही आयोग के एक सदस्य घटनास्थल का दौरा करेंगे।
लालपुरा ने कहा, ‘‘हल्द्वानी में रेलवे की जमीन है और वहां लोग वर्षों से रह रहे हैं। उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिया है कि उन्हें कहीं और रहने की जगह दिए बिना नहीं हटाया जाना चाहिए। आयोग के सदस्य वहां जाएंगे, लोगों से बात करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि उन्हें एक वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया जाए।"
लालपुरा ने कहा कि वहां अल्पसंख्यक समुदाय के लोग भी हैं और आयोग यह सुनिश्चित करेगा कि उनके साथ अन्याय न हो।
रेलवे के मुताबिक, उसकी भूमि पर 4,365 परिवारों ने अतिक्रमण किया है। चार हजार से अधिक परिवारों से संबंधित लगभग 50,000 व्यक्ति विवादित भूमि पर निवास करते हैं, जिनमें से ज्यादातर मुस्लिम हैं।
शीर्ष अदालत ने साथ ही रेलवे तथा उत्तराखंड सरकार से हल्द्वानी में अतिक्रमण हटाने के उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर याचिकाओं पर जवाब भी मांगा था।
लालपुरा ने कहा कि एनसीएम ने लतीफपुरा और जालंधर में रहने वाले सिखों को हटाये जाने का स्वत: संज्ञान लिया है, जिन्हें बिना आश्रय दिए बेदखल कर दिया गया है। एनसीएम ने मामले में पंजाब के मुख्य सचिव से तत्काल रिपोर्ट मांगी है।
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