नयी दिल्ली, 14 जुलाई राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने निजी क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल और भारती हेक्साकॉम को एयरसेल को 112 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है।
एनसीएलएटी की तीन सदस्यीय पीठ ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की मुंबई पीठ के एक मई, 2019 के आदेश को रद्द कर दिया। एनसीएलटी ने भारती एयरटेल और भारती हेक्साकॉम को एयरसेल और डिशनेट वायरलेस के साथ 453 करोड़ रुपये के स्पेक्ट्रम व्यापार करार में 112 करोड़ रुपये रोकने या ‘सेट-ऑफ’ करने की अनुमति दी थी।
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भारती एयरटेल और भारती हेक्साकॉम ने एयरसेल और डिशनेट वायरलेस को 341 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया था लेकिन 112 करोड़ रुपये एयरसेल की इकाइयों पर एयरटेल की इकाइयों के बकाया के रूप में रोक लिए थे।
अपीलीय न्यायाधिकरण ने कहा कि दोनों कंपनियां कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) और दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता में रोक के तहत हैं। और किसी तरह का लेखा करार इससे ऊपर नहीं हो सकता।
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एनसीएलएटी ने मौजूदा अपील को स्वीकार करते हुए एनसीएलटी, मुंबई के एक मई, 2019 के आदेश को खारिज करते हुए भारती एयरटेल और भारती हेक्साकॉम को एयरसेल की रोकी गई राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया। एनसीएलएटी ने यह आदेश एयरसेल और डिशनेट वायरलेस के समाधान पेशेवर की याचिका पर दिया है।
भारती समूह द्वारा 112 करोड़ रुपये रोकने के कदम पर भारतीय स्टेट बैंक ने भी आपत्ति जताई थी। बैंक का कहना था कि वह वित्तीय ऋणदाता है और स्पेक्ट्रम संपत्तियों तथा स्पेक्ट्रम की बिक्री से लाभ पर पहला अधिकार उसका बनता है।
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