नाटो के अगले महीने होने वाले शिखर सम्मेलन से पहले स्वीडन को शामिल करने की यह आखिरी कोशिश है।
उल्लेखनीय है कि नाटो का विस्तार करने के लिए सर्वसम्मति से सदस्यों देशों की मंजूरी लेनी होती है। तुर्किये ने स्वीडन पर उन समूहों के प्रति लचर रुख अपनाने का आरोप लगाया है जिन्हें वह अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानता है। इनमें उग्रवादी कुर्दिश संगठन और वर्ष 2016 में तख्तापलट की कोशिश से जुड़े लोग शामिल हैं।
स्टोलटेनबर्ग ने कहा कि वह स्वीडन की उम्मीदवारी को लेकर तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोआन से बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि साथ ही स्वीडन और पड़ोसी फिनलैंड के वरिष्ठ अधिकारियों से भी चर्चा की जा रही है। फिनलैंड इसी साल अप्रैल में दुनिया के सबसे बड़े सुरक्षा संगठन का 31वां सदस्य बना था।
स्टोलटेनबर्ग ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘लिथुआनिया की राजधानी विलनियस में 11 जुलाई से शुरू हो रहे सम्मेलन से पहले हम ब्रसेल्स में उच्चस्तरीय बैठक बुलाने को सहमत हुए हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इसका उद्देश्य स्वीडन के नाटो में शामिल होने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है।’’
नाटो प्रमुख ने हालांकि बैठक की तारीख नहीं बताई लेकिन कहा कि इसमें सदस्य देशों के विदेश मंत्री, खुफिया प्रमुख और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शामिल होंगे।
गौरतलब है कि यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद स्वीडन और फिनलैंड ने संभावित हमले की आशंका की वजह से सैन्य तटस्थता की अपनी पारंपरिक नीति त्याग दी थी और नाटो की छत्रछाया के तहत सुरक्षा मांगी थी।
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