देश की खबरें | नगालैंड शहरी निकाय चुनाव : केंद्र ने रुख स्पष्ट करने के लिए उच्चतम न्यायालय से मांगा समय

नयी दिल्ली, छह मार्च केंद्र ने उच्चतम न्यायालय को बताया है कि वह शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने वाले नगरपालिका अधिनियम को निरस्त करने के नगालैंड के फैसले की वैधता पर चर्चा करने की प्रक्रिया में है। केंद्र ने मामले पर अपना रुख स्पष्ट करने के लिए अदालत से दो सप्ताह का समय मांगा है।

उच्चतम न्यायालय ने पूर्व में केंद्र से कहा था कि वह इस पर अपना पक्ष रखे कि क्या नगालैंड नगरपालिकाओं और नगर परिषदों में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण की संवैधानिक योजना को निरस्त कर सकता है।

नगालैंड विधानसभा ने नगरपालिका अधिनियम को निरस्त करने का प्रस्ताव पारित किया था और निकाय चुनाव नहीं कराने का संकल्प जताया था।

केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) के.एम. नटराज ने शीर्ष अदालत के 17 अप्रैल के आदेश का पालन करने के लिए न्यायमूर्ति एस.के. कौल और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ से दो सप्ताह का समय मांगा।

उच्चतम न्यायालय ने पांच अप्रैल को नगालैंड में शहरी स्थानीय निकाय चुनावों को अगले आदेश तक रद्द करने वाली 30 मार्च की अधिसूचना पर रोक लगा दी थी, जो लगभग दो दशक के बाद 16 मई को प्रस्तावित थे।

आदिवासी और सामाजिक संगठनों के दबाव के बाद नगालैंड विधानसभा ने नगरपालिका अधिनियम को निरस्त करने और चुनाव न कराने का प्रस्ताव पारित किया था।

उच्चतम न्यायालय राज्य में स्थानीय निकाय चुनावों में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण के अनुरोध वाली याचिका पर सुनवाई कर रही है।

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