कोहिमा, दो अगस्त नगा होहो ने केंद्र से नगा राजनीतिक मुद्दे के स्थायी समाधान के लिए "ईमानदार, दृढ़ और ठोस" प्रयास करने का आग्रह किया है।
अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर और नगालैंड तथा म्यांमा के कुछ हिस्सों में फैले नगाओं के शीर्ष निकाय नगा होहो ने बृहस्पतिवार को दीमापुर में 2024-28 के कार्यकाल के लिए अपनी पहली संघीय सभा के दौरान यह बात कही।
होहो के मीडिया प्रकोष्ठ द्वारा जारी एक बयान में कहा गया, "भारत सरकार को नगा मुद्दे का स्थायी समाधान निकालने के लिए ईमानदार, दृढ़ और ठोस प्रयास करना चाहिए, जो सभी हितधारकों के लिए स्वीकार्य, समावेशी और टिकाऊ हो।"
इसमें कहा गया है कि 25 जुलाई, 1997 को पहले संघर्ष विराम समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद से पिछले 27 वर्षों से नगाओं और भारत सरकार के बीच शांति वार्ता जारी है।
उसने कहा कि इसके बाद, भारत सरकार ने विभिन्न चरणों में नगा समूहों के साथ समझौते किए हैं, जिनमें सबसे उल्लेखनीय 3 अगस्त, 2015 को रूपरेखा समझौता और 17 नवंबर, 2017 को सहमत स्थिति है।
इसने आरोप लगाया, "हालांकि, भारत सरकार की ईमानदारी और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण नगाओं के साथ भारत सरकार द्वारा हस्ताक्षरित हर समझौता अनिर्णायक रहा है।"
इस बात पर जोर देते हुए कि "खुला संघर्ष नहीं होना स्थायी शांति नहीं है", होहो ने दोहराया कि केंद्र को इस जटिल मुद्दे का स्थायी समाधान निकालने के लिए एक ईमानदार, दृढ़ और ठोस प्रयास करना चाहिए।
इसने क्षेत्र में जातीय संघर्षों के लिए राज्य और केंद्र दोनों सरकारों की "गैर-जिम्मेदार, उदासीन और अदूरदर्शी नीतियों" को जिम्मेदार ठहराया। इन संघर्षों में सबसे हालिया संघर्ष मणिपुर में कुकी-मेइती संघर्ष है।
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