नयी दिल्ली, 10 दिसंबर दिल्ली पुलिस ने उच्च न्यायालय के समक्ष दावा किया है कि कथित तौर पर दुश्मनी को बढ़ावा देने के मामले में गिरफ्तार कार्यकर्ता नदीम खान ने "चुनिंदा सूचनाओं के लक्षित प्रसार" के माध्यम से मौजूदा सरकार द्वारा एक खास समुदाय को उत्पीड़ित किये जाने की कहानी गढ़ने की कोशिश की।
पुलिस ने कहा कि इस तरह की कार्रवाइयां असंतोष और अशांति को भड़काने के लिए जानबूझकर किए गए प्रयास का संकेत देती हैं, जो सांप्रदायिक सद्भाव और सार्वजनिक व्यवस्था को कमजोर करने की एक बड़ी साजिश है।
पुलिस ने खान की उस याचिका के जवाब में दायर एक स्थिति रिपोर्ट में ये आरोप लगाए, जिसमें 30 नवंबर को उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने की मांग की गई थी।
अदालत ने खान की याचिका पर स्थिति रिपोर्ट के लिए पुलिस को नोटिस जारी किया था और जांच में शामिल होने की शर्त पर, सुनवाई की अगली तारीख तक उन्हें गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान किया था।
पुलिस की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘याचिकाकर्ता (खान) ने विशिष्ट अतीत की घटनाओं से संबंधित चुनिंदा और भ्रामक सूचनाओं के लक्षित प्रसार के माध्यम से एक विशेष समुदाय के सदस्यों को मौजूदा सरकार द्वारा उत्पीड़ित किये जाने की कहानी गढ़ने की कोशिश की है।"
इसमें कहा गया है कि चुनिंदा चित्रण न केवल तथ्यात्मक रूप से विकृत था, बल्कि समुदाय के भीतर उत्पीड़न की भावनाओं को जागृत करने के उद्देश्य से सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था।
पुलिस ने आरोप लगाया कि खान के आचरण ने सांप्रदायिक सौहार्द पर पड़ने वाले प्रभावों को जानबूझकर नजरअंदाज किया।
इसने कहा है, ‘‘इस तरह की जानकारी प्रसारित करके, याचिकाकर्ता ने ऐसा काम किया है जो न केवल वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करता है, बल्कि भारत के संविधान में निहित शांति और एकता के मूलभूत मूल्यों के लिए एक गंभीर खतरा भी पैदा करता है।’’
पुलिस ने कहा है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और अदालत से याचिकाओं को खारिज करने तथा उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण देने का आग्रह किया गया है।
मामले की अगली सुनवाई 11 दिसंबर को होगी।
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