नयी दिल्ली, 21 फरवरी छत्तीसगढ़ सरकार ने उच्चतम न्यायालय को शुक्रवार को सूचित किया कि वह नान घोटाला मामले में पूर्व महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाएगी।
न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने राज्य के उपमहाधिवक्ता रवि शर्मा का बयान दर्ज किया, जिन्होंने कहा कि वर्मा को 28 फरवरी तक गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।
शीर्ष अदालत ने छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी कर 28 फरवरी तक जवाब मांगा।
प्राथमिकी में वर्मा के खिलाफ आरोप है कि उन्होंने नागरिक आपूर्ति निगम (नान) घोटाले के आरोपी अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला को मामले में जमानत दिलाने में मदद की।
कथित भ्रष्टाचार का यह मामला घटिया गुणवत्ता वाले चावल, चना, नमक आदि की आपूर्ति से संबंधित है और इस मामले में नौकरशाहों सहित कई बड़े व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया था।
सुनवाई के दौरान वर्मा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और अधिवक्ता सुमीर सोढ़ी ने दलील दी कि उन्हें सिर्फ इसलिए परेशान किया जा रहा है, क्योंकि व्यवस्था में बदलाव हुआ है और आरोपों के आधार पर कोई अपराध नहीं बनता।
रोहतगी ने कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ आरोप यह है कि उन्होंने अदालत में आरोपियों के लिए जवाब तैयार किया, जिससे उन्हें 2019 में मामले में जमानत पाने में मदद मिली।
उन्होंने कहा, ‘‘महाधिवक्ता जवाब तैयार नहीं करते हैं। उन्हें इसलिए निशाना बनाया जा रहा है, क्योंकि राज्य में सरकार बदल गई है। आरोपी को 2019 में जमानत दी गई थी और राज्य सरकार ने अब तक इसे चुनौती नहीं दी है तथा आदेश अंतिम हो गया है।’’
रोहतगी ने कहा कि घोटाले से संबंधित धनशोधन मामले में आरोपी को पांच साल पहले जमानत दी गई थी, जिसे उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई थी और यह मामला यहां लंबित है।
उन्होंने कहा कि वर्मा अग्रिम जमानत के हकदार हैं, क्योंकि उन पर मामले में सह-आरोपियों के साथ व्हाट्सऐप चैट के आधार पर मामला दर्ज किया गया था।
शर्मा ने दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि उन्हें कुछ सामग्री रिकॉर्ड पर लाने की जरूरत है और उन्होंने अदालत को आश्वासन दिया कि पूर्व महाधिवक्ता को तब तक गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।
पीठ ने कहा कि जब तक राज्य सरकार वर्मा की याचिका पर जवाबी हलफनामा दायर नहीं कर देती, तब तक वह कुछ अंतरिम राहत प्रदान करेगी।
शर्मा ने पीठ से अनुरोध किया कि उनका बयान दर्ज किया जाए और तब तक कोई निर्देश न दिया जाए।
पीठ ने बयान दर्ज किया और सुनवाई 28 फरवरी के लिए निर्धारित कर दी।
वर्मा ने उच्च न्यायालय के 13 फरवरी के आदेश को चुनौती दी है, जिसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भादंसं के तहत दर्ज मामले में उन्हें अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। इससे पहले निचली अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
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